कानपुर। व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच में अब मशीनों ने आरटीओ के पुराने सिस्टम की सच्चाई उजागर कर दी है। ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर शुरू होने के बाद ऐसे वाहनों की लंबी कतार लग गई है जो पहले फोटो खिंचवाकर फिट घोषित हो जाते थे। ये वाहन अब मशीनों की कसौटी पर अनफिट साबित हो रहे हैं। ऐसे में एक दिन में करीब 15 से 20 वाहन स्वामियों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। एक दिन में सिर्फ पांच से सात वाहन ही फिटनेस प्रमाणपत्र ले पा रहे हैं। सख्ती की वजह से ज्यादातर वाहन स्वामी कानपुर देहात में फिटनेस कराने पहुंच रहे हैं।
जिले में 15 अक्तूबर से चौबेपुर स्थित एयर सेल्स कॉरपोरेशन ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर में वाहनों की फिटनेस जांच शुरू की गई है। जिसमें 163 से अधिक वाहन जांच कराने पहुंचे। सिर्फ 58 गाड़ियां ही फिट निकली और 105 अनफिट निकलीं। नई व्यवस्था में हर वाहन की जांच सेंसर, कैमरा और मशीनों से की जा रही है। परिणामस्वरूप अधिकांश वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल हो रहे हैं। बीते 15 दिनों में केवल 58 वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र मिल पाया है। वहीं 15 दिन पहले की बात करें तो एक दिन में 120 से 150 वाहन फिट घोषित कर दिए जाते थे वह भी महज फोटो खींचकर। इसके लिए वाहन स्वामियों को गाड़ियों के हिसाब से सुविधा शुल्क खर्च करना पड़ता था।
अब नहीं चल पा रहा पुराना खेल
बीते कई वर्षों से पनकी मौरंग मंडी स्थल के पास सड़क पर फिटनेस जांच महज औपचारिकता बनकर रह गई थी। अधिकारी कुर्सी पर बैठकर वाहन देखते थे और फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर देते थे। अब ऑटोमेटेड प्रक्रिया में सिस्टम खुद तय करता है कि वाहन फिट है या नहीं। किसी व्यक्ति का हस्तक्षेप नहीं होने से अफसरों के मिलीभगत वाली फिटनेस का रास्ता बंद हो गया है। वहीं सूत्रों के मुताबिक कानपुर देहात में आटोमेटिक सिस्टम होने के बाद भी गाड़ियों का अपने अनुसार फिटनेस करने का सिस्टम चल रहा। जिसके चलते ज्यादातर वाहन स्वामी फिटनेस कराने के लिए वाहन कानपुर देहात आरटीओ कार्यालय लेकर जा रहे हैं।
अनफिट वाहनों का स्लॉट री-शेड्यूल कराने की नौबत
अब ऑनलाइन स्लॉट बुक करने वाले वाहन मालिकों की नई परेशानी यह है कि टेस्ट में वाहन फेल होने पर फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहा। ऐसे में उन्हें गाड़ी की मरम्मत कराकर स्लॉट री-शेड्यूल कराना पड़ रहा है। आरआई आरटीओ सूत्रों के मुताबिक, आटोमैटिक सिस्टम होने के कारण बहुंत कम वाहन स्वामी केंद्र पर पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन औसतन 15–20 वाहन जांच के लिए पहुंच रहे हैं लेकिन उनमें से अधिकांश अनफिट पाए जा रहे हैं।
वर्जन-
अब वाहनों की फिटनेस ऑटोमैटिक सिस्टम से हो रही है। विभाग के पास कोई मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं है। जरा सी कमी पर मशीन अनफिट कर देती है। 15 दिन में सिर्फ 58 वाहन फिट हो सके हैं करीब 105 अनफिट हो गए। ऐसे में ज्यादातर लोगों को जांच री-शेड्यूल करानी पड़ रही है।
संतोष कुमार राय, आरआई, आरटीओ