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मां तुझे प्रणाम: गांधी जी के कहने पर पार्षद जी ने फूलबाग में लिखा था झंडा गीत

Mon, 08 Aug 2022 10:06 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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मां तुझे प्रणाम - फोटो : अमर उजाला
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विजयी विश्व तिरंगा प्यारा... झंडा ऊंचा रहे हमारा... तिरंगे की महिमा को बताने वाले इस झंडा गीत को शहर के पद्मश्री श्याम लाल गुप्त उर्फ पार्षद जी ने तीन और चार मार्च 1924 को फूलबाग में बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर लिखा था। आज उस स्थान पर पार्षद जी की प्रतिमा है। झंडा गीत की रचना महात्मा गांधी की इच्छा के अनुरूप की गई थी।

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महात्मा गांधी की इच्छा के बारे में श्यामलाल गुप्त को गणेश शंकर विद्यार्थी ने बताया था। नरवल गांव में नौ सितंबर 1896 को जन्मे श्याम लाल गुप्त के पिता का नाम विश्वेश्वर प्रसाद और मां का नाम कौशल्या देवी था। कानपुर इतिहास समिति के सचिव शांतनु चैतन्य ने बताया कि 1925 में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में सबसे पहले झंडा गीत गाया गया था।

यहीं पर गीत सुनकर महात्मा गांधी ने इसको मान्यता दी थी। इस गीत के पहले भी श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ ने एक झंडा गीत लिखा था। उस गीत की पहली पंक्ति थी - राष्ट्र गगन की दिव्य ज्योति, राष्ट्रीय पताका नमो-नमो। यह ध्वज गीत ज्यादा चर्चा में नहीं आया, हालांकि इसे कांग्रेस सेवादल ने अपना लिया था। झंडा गीत ने श्यामलाल गुप्त को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

एक बार जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, भले ही लोग पार्षद जी को नहीं जानते होंगे, परंतु समूचा देश राष्ट्रीय ध्वज पर लिखे उनके गीत से परिचित है। श्री श्याम लाल गुप्त पार्षद स्मारक समिति के समन्वयक सुरेश गुप्ता ने बताया कि 1929 को महात्मा गांधी के कानपुर प्रवास के दौरान पार्षद जी की ड्यूटी महात्मा गांधी की सेवा में लगाई गई थी।
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उसी समय मां कस्तूरबा ने इनका नाम पार्षद रखा था। गणेश शंकर विद्यार्थी और साहित्यकार प्रताप नारायण मिश्र के सानिध्य में आने पर पार्षद जी ने अध्यापन, पुस्तकालयाध्यक्ष और पत्रकारिता के विविध जनसेवा कार्य भी किए थे। असहयोग आंदोलन में भाग लेने के कारण 21 अगस्त 1929 को पार्षद जी को गिरफ्तार कर लिया गया था।

अंग्रेजों ने उन्हें क्रांतिकारी घोषित करके केंद्रीय कारागार आगरा भेज दिया था। 1930 में नमक आंदोलन के सिलसिले में वे पुन: गिरफ्तार हुए थे और कानपुर जेल में रखे गए थे। बताया जाता है कि पार्षद जी जीवन भर नंगे पैर ही चले थे। 10 अगस्त 1977 को उनका देहांत हो गया था।
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