हमीरपुर सदर विधानसभा के उप चुनाव में वोट का प्रतिशत गिरने का मुख्य कारण लगातार मानसूनी बारिश होना माना जा रहा है। भारी बारिश के बीच 48.10 फीसदी मतदाता बूथों पर पहुंच पाए। इससे पहले हुए दो विधानसभा चुनावों में मतदान का प्रतिशत 60 से ऊपर रहा है।
चुनावी इतिहास में वर्ष 1952 में सबसे कम 37.68 फीसदी वोटिंग हुई थी तोे 1991 में हुए विधानसभा चुनाव में 49.76 प्रतिशत मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था। सदर विधानसभा में आजादी के बाद से अब तक 16 बार आम चुनाव हुए हैं। वहीं पिछले सोमवार को हुए उप चुनाव के अलावा 2014 में भी मतदाताओं में वोट डाले थे।
पहली बार 1952 में हुए विधानसभा के आम चुनाव में मतदान का प्रतिशत सिर्फ 37.68 फीसदी रहा था। तब विधानसभा क्षेत्र में कुल 63 हजार 583 मतदाताओं में 24,158 ने ही वोट डाले थे। तो 1991 के चुनाव में 49.76 प्रतिशत मतदाता वोट डालने बूथों पर पहुंचे।
जिसमें कुल 1,64,291 मतदाताओं में 81,754 ने मतदान किया था। देखा जाए तो वर्ष 1985 में 50.55 फीसदी मतदान हुआ। जिसमें 1,38,176 में 69,847 ने वोटिंग की। वहीं 2002 में 50.93 फीसदी, 2008 में 50.37 फीसदी मतदान हुआ है। वहीं 1957 में 51.4 प्रतिशत, 1962 में 51.41 प्रतिशत, 1967 में 51.97 प्रतिशत वोटिंग हुई।
60 फीसदी से अधिक मतदान वर्ष 1977, 2012 व 2017 में हुआ। 2012 और 2017 के चुनावों में निर्वाचन आयोग के निर्देश पर अधिकारियों ने रैलियों के जरिये लोगों को जागरूक करने का काम किया। इस उपचुनाव में मतदान का प्रतिशत 70 के पार का नारा दिया गया।
शहरी क्षेत्रों से लेकर बड़ी आबादी के गांवों में अधिकारियों ने कार्यशाला का आयोजन किया। इनमें ग्राम स्तर की महिला कार्यकर्ताओं व प्रधानों में ज्यादा से ज्यादा मतदान कराए जाने का संकल्प लिया। जिला निर्वाचन अधिकारी अभिषेक प्रकाश ने कहा रात एक बजे तक ईवीएम स्ट्रांग रूम में जमा करने का काम चलता रहा। कहा कि फाइनल मतदान 48.10 फीसदी हुआ है।