कहते हैं कमल कीचड़ में ही खिलता है अाैर जब खिलता है ताे किसी खास काे ही मिलता है। अगर ये खास श्रीराम हाें ताे फिर कहना ही क्या। कुछ एेसा ही उरई के एक गांव में हुअा जब हर किसी के मुंह से निकला अाखिर कीचड़ में खिले हुये कमल काे श्रीराम ने गले लगा ही लिया।
बुधवार का दिन था। कदौरा थाना क्षेत्र के पंडोरा गांव निवासी श्रीराम पुत्र रामदयाल अपने घर पर शौचालय निर्माण के लिए चंदरसी गांव के पास नदी से मौरंग लेने जा रहे थे। शायद श्रीराम काे अंदाजा हाे गया था कि उनके घर पर जल्द ही इसकी जरूरत पड़ेगी। सुबह सात बजे श्रीराम जैसे ही चंदरसी गांव के पास पहुंचे तो उन्हें एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी।
न्होंने चालक से ट्रैक्टर रोकने को कहा और उतरकर इधर-उधर देखने लगे। वह चंद कदम चलकर गए ताे सड़क किनारे कीचड़ में एक नवजात बच्ची पड़ी थी। उन्होंने उसे उठाकर शरीर को कपड़े से साफ किया और शाल से लपेट लिया। इसके बाद वह मौरंग न लेने जाकर वापस अपने गांव लौट गए। उन्होंने उस बच्ची को अपनी पत्नी की गोद में दिया। श्रीराम व उसकी पत्नी सीमा ने पूरे गांव के सामने उस बच्ची को अपना लिया।
सीमा ने कहा कि उनके सिर्फ तीन पुत्र है भगवान ने आशीर्वाद के रूप में उसे पुत्री दी है। लोकलाज या फिर किन्ही अन्य कारणों से फेंकी गई नवजात बच्ची जब श्रीराम को मिली तो वह अपने गांव लेकर पहुंच गया। बच्ची मिलने की खबर क्षेत्र में फैल गए। कई लोग श्रीराम के घर उस बच्ची को गोद लेने की मंशा लिए पहुंच गए, लेकिन श्रीराम ने कहा कि वह बच्ची को अपना चुका है, अब वह उसकी बेटी है।