इटावा लोकसभा सीट पर गठबंधन का प्रयोग 33 साल बाद एक बार सफल साबित हुआ है। इससे पहले सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और बसपा संस्थापक कांशीराम के बीच समझौता होने पर इस प्रयोग ने सफलता पाई थी। मोदी लहर में दो बार यह सीट लगातार भाजपा के पाले में रही। इस बार इंडिया गठबंधन ने भाजपा को करारी शिकस्त दी।
राजनीतिक गलियारों में इटावा लोक सभा सीट की एक अलग ही पहचान है। इससे जो भी प्रत्याशी जीतता है वह देश का हर एक नेता की नजर में आ जाता है। कारण यह सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राजनीतिक दलों के गठबंधन कर प्रदेश भर में राजनीतिक दांवपेच की अपनी पहचान बना ली है। तो वहीं इटावा सीट पर किया गया गठबंधन का प्रयोग पूरी तरह 33 साल बाद सफल हुआ।
इटावा सीट के लिए औरैया सदर से सपा को कुल एक लाख 80 हजार 52 मत मिले। जबकि भाजपा को एक लाख 48 हजार 894 वोट ही मिल सके। इस प्रकार दोनों विधान सभाओं से कुल 31 हजार 158 मतों का अंतर रहा। यही स्थित कन्नौज लोकसभा सीट के लिए विधान सभा में भी रही। यहां सपा को एक लाख 19 हजार 843 और भाजपा को 80 हजार सात वोट ही प्राप्त हो सके।