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मुद्दे नहीं जज्बातों का रंग हो रहा गाढ़ा: महिलाओं में मुफ्त राशन मिलने से खुशी, युवाओं के लिए ये बड़ा मुद्दा

Mon, 06 May 2024 11:15 AM IST
शिखा पांडेय मनीष निगम, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: कैंट विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने माना, इस क्षेत्र में सपा-कांग्रेस गठबंधन से विपक्ष को फायदा मिलेगा।
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लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कैंट विधानसभा क्षेत्र, जैसा कि नाम से ही जाहिर है कि इस विधानसभा क्षेत्र के एक बड़ा भू-भाग सेना का छावनी क्षेत्र है। यहांं के अधिकांश हिस्से का विकास कार्य छावनी बोर्ड के माध्यम से कराया जाता है। 2012 में परिसीमन के बाद पुनर्गठित हुई इस मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने भाजपा विरोधी पार्टियों को ही सिर आंखों पर बैठाया है। 

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चूंकि, इस सीट पर भाजपा जहां सिकुड़ती जा रही है, वहीं कांग्रेस और सपा का ग्राफ बढ़ रहा है। इस बार दोनों पार्टियों का गठबंधन है, ऐसे में भाजपा के लिए जहां इस सीट पर बढ़त बनाना चुनौती है। वहीं, कांग्रेस के लिए यह बढ़त पाने का मजबूत केंद्र बन गया है। क्षेत्र के लोगों से हुई बातचीत से भी जो तस्वीर निकलकर सामने आई है उससे यह साफ है कि लोगों ने अपना मन पहले ही बना लिया है। हालांकि कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। मतदाताओं का कहना हैं कि चुनाव मुद्दे पर नहीं जज्बातों पर लड़े जा रहे हैं। इस क्षेत्र में लोकसभा चुनाव में भाजपा को विपक्ष की तुलना में 15 से 20 हजार वोट कम मिलते हैं।

नेतृत्व बदला पर समस्याएं जस की तस
समस्या की दृष्टि से देखे तो यहां के बाबूपुरवा रेलवे कालोनी, सुजातगंज, लेबर कालोनी में पानी की आपूर्ति और जलभराव के अलावा खस्ता हाल सड़कों की समस्या आए दिन बनी रहती हैं। इसके पीछे स्थानीय मतदाताओं के विकास की बजाय अन्य मुद्दों को चुनाव के समय तवज्जो देना तो एक कारण है। साथ ही सरकार के विपक्ष का विधायक होना भी क्षेत्र के विकास की राह में रोड़े अटकाता है। 2012 में सपा की सरकार के दौरान भाजपा के रघुनंदन भदौरिया जीते जबकि 2017 में कांग्रेस-सपा के सोहिल अंसारी और 2022 में सपा के मो. हसन रूमी भाजपा की प्रदेश सरकार के समय जीते। इससे विकास की रफ्तार अन्य क्षेत्रों की तुलना में इस क्षेत्र में सुस्त रही है।

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क्या कहते हैं समीकरण

भाजपा का गिरता गया ग्राफ
परिसीमन से पहले भाजपा के जिले के कद्दावर नेता व विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना कैंट सीट से चुनाव लड़ते और जीतते रहे। 2007 के चुनाव में वह करीब 46 फीसदी वोट पाए। परिसीमन के बाद जाजमऊ, बाबूपुरवा व सुजातगंज जैसे मुस्लिम बाहुल्य इलाके जुड़े तो भाजपा का इस सीट पर ग्राफ गिरना शुरू हो गया। 2012 के चुनाव में भाजपा के रघुनंदन भदौरिया स्थानीय चुनावी गणित के कारण जीते तो लेकिन 2007 की तुलना में वोट प्रतिशत 16 फीसदी घट गया। करीब नौ हजार वोट के अंतर वाली जीत के बाद 2014 के लोकसभा से लेकर 2022 के विधानसभा चुनाव तक भाजपा की हार का अंतर 20 हजार तक पहुंच गया।

बढ़ता जा रहा विपक्ष की जीत का अंतर
2012 के चुनाव में भले ही भाजपा का प्रत्याशी जीता, लेकिन सपा को करीब तीन और कांग्रेस को छह फीसदी वोट का फायदा हुआ। 2017 के चुनाव में मतदाताओं ने कांग्रेस का हाथ थामा और पार्टी का वोट प्रतिशत करीब 25 फीसदी तक बढ़ गया। भाजपा हारी लेकिन मतों में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई क्योंकि बसपा को 10 फीसदी वोटों का नुकसान हुआ। लेकिन 2022 के चुनाव में मतदाताओं का मोह कांग्रेस से भंग हुआ और वोटों का बड़ा हिस्सा सपा की ओर मुड़ गया। मतदाताओं ने सपा को वोट दिया तो मो. हसन रूमी विधायक बन गए। बसपा को इस चुनाव में दो फीसदी से कम वोट मिले। हालांकि इस दौरान विपक्ष से जीतने वाले प्रत्याशी को भाजपा से पंद्रह से बीस हजार वोट ज्यादा मिले।

विधानसभा क्षेत्र का विकास नहीं हो रहा। सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है लेकिन नेता आकर वायदे करते हैं और नतीजे के बाद गायब हो जाते हैं। इलाके को मेट्रो जैसी सौगात भी नहीं मिल पा रही जबकि क्षेत्र से हर पार्टी के विधायक बनते रहे हैं। - हेमंत मिश्रा, पीएसी मोड़

श्रीप्रकाश जायसवाल के बाद दो सांसद चुने गए लेकिन दोनों बार तस्वीरें सिर्फ अखबारों में ही देखने को मिली। उन्होंने कभी यहां आकर जनता का दुख दर्द नहीं पूछा। जनता चुनाव में अपना जवाब देगी।- नाजिश खान, मोबाइल दुकानदार

पढ़े लिखे युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। शिक्षा और रोजगार की जगह धर्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। भाजपा के लिए 400 पार करना आसान नहीं है। प्रदेश में कांग्रेस को गठबंधन का फायदा मिलेगा। - मो. फैसल, युवा

विकास के मुद्दों को छोड़कर आस्था और भावनाओं पर चुनाव लड़ा जा रहा है। सरकार ने कोरोना काल में राशन बांटने की अच्छी शुरूआत की, लेकिन वोटिंग ज्यादा हुई तो कांग्रेस को भरपूर फायदा मिलेगा। - मो. चांद, हलवाई

घर की महिलाएं खुश हैं कि मुफ्त राशन बांटा जा रहा है। लोगों के पास काम नहीं है। चमड़ा कारोबार और टेनरियों काे यहां से शिफ्ट होना भी रोजगार के लिहाज से नुकसानदायक है। - मुश्ताक, बुजुर्ग

जीटी रोड स्थित गंगागंज में सालों पहले पानी की टंकी बनी थी। इसमें एक भूमिगत टैंक बनाया गया है लेकिन आज तक इससे किसी को पानी नहीं मिला। वहीं साल दर साल जलस्तर गिरता जा रहा है । साथ ही पानी की गुणवत्ता भी खराब हो रही है। - मनोज कुमार, स्थानीय निवासी

 
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मुख्य इलाके:
जाजमऊ का बड़ा हिस्सा, पैराशूट फैक्टरी, रेलवे कालोनी, बाबूपुरवा लेबर कालोनी, सुजातगंज, डीएमएसआरडी, मुंशीपुरवा, गधियाना, तिश्तीनगर, अजीतगंज, कैंट, श्यामनगर, लाल बंगला का कुछ हिस्सा

किसकी कितनी हिस्सेदारी
मुस्लिम- 1 लाख 90 हजार
ब्राह्मण- 40 हजार
अनुसूचित जाति- 35 से 40 हजार
ठाकुर- 30 से 40 हजार
पिछड़ी जाति- 30 हजार जिसमें यादव और लोध अधिक है
वैश्य- 15 से 20 हजार

प्रमुख समस्याएं
- आवारा जानवर
- खराब स्ट्रीट लाइट
- नलों में आ रहा प्रदूषित पानी
- सड़कों पर दुकानों का अतिक्रमण
- ई-रिक्शे के चलते लगने वाला जाम
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