मुकेश राजपूत, राजवीर सिंह, साक्षी महाराज
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यह लोकसभा चुनाव भाजपा के दिग्गज नेता रहे कल्याण सिंह के बिना हो रहा है। उन्होंने अपने रहते ही लोध बेल्ट में अपनी विरासत के चेहरे तैयार कर लिए थे। इनमें बेटे राजवीर, साक्षी महाराज और सांसद मुकेश राजपूत शामिल हैं। इस बार इनके लिए जीत के साथ ही विरासत की कसौटी पर खरा उतरना भी चुनौती होगी।
कल्याण सिंह लोधी बिरादरी का बड़ा चेहरा थे। यूपी में आबादी के हिसाब से लोधी समाज की तकरीबन 8 फीसदी हिस्सेदारी है। यह विधानसभा की 70 से 80 फीसदी सीटों पर जीत-हार तय करती है। लोकसभा की लगभग 10 सीटों पर इन्हीं से समीकरण सधता है। इस चुनाव में कल्याण की विरासत उनकी त्रिमूर्ति पर टिक गई है।
लोधी बहुल एटा, इटावा, बुलंदशहर, आगरा, फर्रुखाबाद, बदायूं, हाथरस, बरेली सीट भाजपा के पास हैं। 2019 के चुनाव में मुरादाबाद सपा और अमरोहा सीट बसपा ने जीती थी। इन सीटों की हवा कन्नौज, हरदोई, शाहजहांपुर, बदायूं, मैनपुरी में भी असर डालती है। इनमें मैनपुरी छोड़कर बाकी सीट पिछले चुनाव में भाजपा जीती थी। साक्षी महाराज के उन्नाव से उतरने के बाद यहां की आसपास की सीट पर भी उनका प्रभाव असर करता रहा है। रुनी चुरसई के अरविंद राजपूत कहते हैं कि लोधी बिरादरी ने हमेशा कल्याण सिंह पर भरोसा किया। इन्होंने ही उन्हें बड़ा नेता बनाया था।