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कोरोना योद्धाओं की कहानी, उनकी जुबानी, यकीनन पढ़कर आपकी आंखों से भी छलक पड़ेंगे आंसू

Mon, 13 Apr 2020 05:52 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कोरोना योद्धा - फोटो : अमर उजाला
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संकट की इस जंग में ऐसे भी कोरोना योद्धा हैं जो अकेले नहीं लड़ रहे हैं। साथ में उनका जीवन साथी भी जंग लड़ रहा है। चाहे वह डॉक्टर दंपति हो या पुलिसकर्मी। आम दिनों में उनका रूटीन भले ही ऐसा हो जिनमें वह कम समय के लिए साथ रहते हों, लेकिन इस लॉकडाउन में कुछ ऐसे हैं जो बिछड़ गए हैं। तो कुछ ऐसे हैं जो ड्यूटी कर अलग-अलग दरवाजों से घर में दाखिल होते हैं।
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हैलट के कोविड-19 हॉस्पिटल के नोडल अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार के घर का पूरा माहौल कोरोना रोगियों का इलाज करने के बाद से बदल गया है। उनकी पत्नी डॉ. शिवानी सिंह भी डफरिन में स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। दोनों अपने घर के अलग-अलग दरवाजों से आते-जाते हैं।

डॉ. अवधेश मुख्य द्वार और उनकी पत्नी पिछले दरवाजे से आती-जाती हैं। ऐसा फैसला सुरक्षा कारणों से लिए गया है। घर में दाखिल होने से पहले बच्चे सैनिटाइज करते हैं। डॉ. अवधेश कुमार ने पर्स रखना बंद कर दिया है। बेल्ट भी नहीं पहनते हैं जिससे संक्रमण किसी भी स्थिति में परिवार को प्रभावित न करने पाए।
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दो बेटियों को भी कोरोना के संबंध में जानकारी दे दी है। डॉ. शिवानी सिंह भी मास्क, गाउन, कैप आदि पहनकर घर से बाहर ड्यूटी के लिए निकलती हैं। डॉक्टर दंपति कहते हैं कि बीमारों का इलाज और घर की सुरक्षा दोनों जरूरी है। इसलिए दोनों जगह एहतियात बरता जाता है। 
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मैं उन्नाव में, पति मुरादाबाद में, ड्यूटी दोनों दे रहे हैं

जब कोरोना संकट की सुगबुगाहट थी तब सिपाही अनीता तिवारी शादी के बंधन में बंधी थीं। उनके पति सौरभ पांडेय भी मुरादाबाद में उपनिरीक्षक हैं। वे दोनों जानते हैं कि पुलिस की सख्त ड्यूटी कैसी होती है। 27 फरवरी को विवाह के बंधन में बंधने के बाद कानपुर देहात में रहने वालीं अनीता लॉकडाउन लगते ही न वे ससुराल गईं न ही मायकें में रुकीं।

उन्होंने सीधे उन्नाव स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में ड्यूटी ज्वाइन कर ली। यहां उन्हें ऐसे बहुत से फोन आते हैं जो कहते हैं घर में खाने को राशन नहीं है। वह उनकी पुकार ऑन ड्यूटी पुलिसवालों तक भेजती हैं।

उनके पति भी पुलिस में हैं इसलिए वह ड्यूटी का महत्व जानते हैं। अनीता कहती हैं कि कोरोना के इस संकट में दोनों अपनी ड्यूटी का महत्व समझते हैं। इसलिए सौरभ ने मुझे ड्यूटी ज्वाइन करने से नहीं रोका। हालांकि ऐहतियात बरतने की सलाह जरूर दी। मैंने भी उनसे कहा कि सुरक्षा जरूरी है लेकिन ड्यूटी का अपना महत्व है।
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