फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुनो सरकार, फरियादें गईं बेकार

Fri, 12 Feb 2016 02:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
बैठो मत, बच्चा तलाशो इंस्पेक्टर
विज्ञापन

30 जनवरी को हैलट में नकाबपोश महिला के हाथों अपने तीन साल के पोते विनायक को खोने वाली राजेश्वरी हाथ जोड़े हुए दरबार में पहुंची।

उसने मामला बताया तो एसएसपी ने इंस्पेक्टर स्वरूपनगर कमल यादव को फोन मिलाकर करीब चार मिनट तक बात की। उन्होंने इंस्पेक्टर से कहा कि जब लग रहा है कि कोई बड़ा गैंग है, तो बैठे क्यों हो, क्राइम ब्रांच की टीम को साथ लो। गुड़गांव, छत्तीसगढ़ जहां भी बदमाश महिला मिले उसे पकड़ो और बच्चा वापस लाओ।

भूमाफिया पर गैंगस्टर लगाओ
पिछले महीने तात्याटोपे नगर में मकान के नाम पर 18 लाख रुपये हड़पने और वापस मांगने पर फायरिंग की गई थी। इसमें पवन सक्सेना और उसका भाई प्रशांत सक्सेना आरोपी हैं।
विज्ञापन


पीड़ित बर्रा आठ निवासी सूर्यकांत और तात्याटोपे नगर की महिला शोभा कप्तान के सामने पहुंचीं तो उन्होंने दरोगा एसपी दुबे को तलब किया और पवन के खिलाफ अब तक गैर जमानती वारंट नहीं लेने पर जवाब मांगा। साथ ही सीओ गोविंदनगर से भूमाफिया के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई करने की भी बात कही।

फिर से देखी जाए ज्योति की पीएम रिपोर्ट
‘सर, मेरी बहन ज्योति को उसके ससुराल वालों ने जलाकर मार डाला है और नौबस्ता पुलिस आत्महत्या बता रही है। सिर्फ पति और सास के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि अन्य ससुराल वाले उसे और उसकी भांजी को मारने की धमकी दे रहे हैं।

ज्योति के भाई सूरज की इस शिकायत के बाद सीओ गोविंदनगर ने बताया कि मजिस्ट्रेटी बयान के मुताबिक ज्योति ने सुसाइड ही किया था। कप्तान ने कहा कि एक बार फिर से पीएम रिपोर्ट देखी जाए।

टीबी अस्पताल में साउथ ऑफिस बनाने की मांग
दरबार से पहले साउथ सिटी के व्यापारियों ने एसपी साउथ की तैनाती पर कप्तान को हार पहनाकर स्वागत किया। व्यापारियों ने एसएसपी से कहा कि जर्जर पड़े साइट नंबर वन स्थित टीबी अस्पताल में ही एसपी साउथ का दफ्तर बनाया जाए। इस पर कप्तान ने सीओ बाबूपुरवा को निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा है।

इस मौके पर हिमांशु पाल, विजय गुप्ता, हरिशंकर, अनूप तिवारी, मोनू पांडे, विनायक पोद्दार, कमल उत्तम, प्रमोद जायसवाल आदि लोग रहे।

कप्तान का आदेश उड़ा दिया हवा में
एसएसपी भले ही जनता की फरियाद सुनने के लिए जनता दरबार लगा रहे हों, लेकिन हकीकत यह है उन्हीं के आदेशों को थाना पुलिस भूल गई। हालात यह हैं कि कुछेक पीड़ितों ने तो अब पुलिस के पास जाना ही छोड़ दिया है।
विज्ञापन


जबकि जूही के एक मामले में कप्तान के दरबार में फरियाद लगाना पीड़ित को ऐसा महंगा पड़ा कि पुलिस हर रोज घर जाकर धमकाती है। पेश है कुछ ऐसे मामले जो दरबार में तो आए पर उन पर कार्रवाई नहीं हो सकी। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें