अब कान की बीमारियों को पता लगाने के लिए किसी उपकरण को कान में नहीं डालना पड़ेगा। आईआईटी के प्रोफेसर ने एम्स पटना के डॉक्टरों के साथ मिलकर प्रोटोटाइप बनाया है। इस प्रोटोटाइप से निकलने वाली रोशनी कान में जाएगी और बीमारियों की सारी जानकारी डिवाइस में स्टोर की गई मेमोरी में आ जाएगी। इसका प्रिंटआउट निकाला जा सकेगा। अक्सर बच्चों से लेकर बड़ों में कान बहने, फंगस, सूजन सहित अन्य बीमारियां होती हैं।
इनका पता लगाने के लिए उपकरणों को कान में डालना पड़ता है, इससे काफी दर्द होता है। इस समस्या को दूर करने के लिए आईआईटी के केमिकल इंजीनियरिंग के प्रो. जयंत कुमार सिंह और उनकी टीम थर्मामीटर, ग्लूकोमीटर, थर्मल गन, ब्लड प्रेशर मॉनीटर की तरह कान की डिवाइस तैयार की रही है। आईआईटी की टीम व एम्स के डॉक्टरों ने अब तक पांच हजार से अधिक मरीजों की कान की बीमारियों संबंधित रिपोर्ट तैयार की है।