कोर्ट के बाहर लगी भीड़ तो बुलाई क्यूआरटी व पीएसी
कोर्ट ने गुरुवार को ही चारों अपराधियों को दोषी करार देकर जेल भेज दिया था। शनिवार को सजा सुनाई जानी थी। दोषियों को कोर्ट लाए जाने की सूचना पर दोपहर से भीड़ लगी रही। इसमें कई अपराधी भी थे। सुरक्षा के लिहाज से कोर्ट के आदेश पर क्विक रिस्पांस टीम व एक सेक्शन पीएसी को बुलाया गया। सजा सुनाने के बाद भारी सुरक्षा में चारों दोषियों को जेल भेज दिया गया।
13 साल बाद हुई जिरह में मोनू पहाड़ी के डर से बयान से पलट गए थे मां-बेटे
एडीजीसी जितेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि मृतक के बेटे गुफरान और मृतक की पत्नी जाहिदा बेगम के बयान वर्ष 2009 में ही कोर्ट में दर्ज हो गए थे, लेकिन अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ताओं ने जिरह नहीं की। कोर्ट ने अवसर समाप्त कर दिया। वर्ष 2020 में दोबारा जिरह की मांग की गई, जिसे कोर्ट ने 500 रुपये हर्ज पर स्वीकार किया और 13 साल बाद वर्ष 2022 को हुई मां-बेटे की जिरह में दोनों बयान से मुकर गए।
गवाही देने पर जान से मारने की धमकी दी
मां-बेटे ने कहा कि वह घटनास्थल पर घटना के समय मौजूद ही नहीं थे। रफाकत की मौजूदगी और गोली चलाते हुए किसी को देखने की बात से भी मुकर गए। मां ने कहा कि बदमाश मोनू पहाड़ी के कहने पर अभियुक्तों के खिलाफ गवाही दी थी। मोनू की मौत के बाद डर खत्म हो गया, तो अब सही बयान कोर्ट में दे रही हूं। कोर्ट ने भी माना कि अभियुक्तों के डर व धमकाने के कारण गवाह बयान से पलट गए। अभियुक्तों को जमानत मिल चुकी थी।
अभियुक्त की मां ने भी लिखाई थी रिपोर्ट
16 फरवरी 2010 को भी एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिसमें कहा गया था कि 15 फरवरी 2010 को शरीफ घर आया और गवाही देने पर जान से मारने की धमकी दी । अभियुक्त रफाकत को पुलिस ने अस्पताल से गिरफ्तार किया था। रफाकत की मां रजिया बेगम ने भी एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसका कहना था कि मोनू पहाड़ी ने साथियों के साथ गोली चलाई जो रफाकत को भी लगी। हालांकि इस मुकदमे के संबंध में कोई सही जानकारी बचाव पक्ष पेश नहीं कर सका।