कानपुर। तमिलनाडु की तर्ज पर अब जीएसवीएम सहित प्रदेश के अन्य एलोपैथिक मेडिकल कॉलेजों में लेवल-वन ट्रामा सुविधाएं मिलेंगी। जीएसवीएम से संबद्ध हैलट अस्पताल में इंटीग्रेटेड ट्रामा एवं आईसीयू सेंटर बनेगा। शासन के निर्देश पर कॉलेज प्रशासन ने कार्ययोजना तैयार करनी शुरू कर दी है। बच्चों के लिए अलग ट्रामा व्यवस्थाएं भी विकसित की जाएंगी। ऐसा होने पर कानपुर और आसपास के करीब 18 जिलों में हादसों में घायल होने वाले मरीजों को समय पर ट्रामा सेंटर की सुविधा मिल सकेगी।
योजना के तहत सभी ट्रामा सेंटरों को आपस में जोड़ा जाएगा। लेवल-1 में प्रमुख मेडिकल कॉलेजों को रखा गया है जबकि लेवल-2 में हाईवे स्थित निजी मेडिकल कॉलेज और लेवल-3 में सीएचसी व पीएचसी शामिल किए गए हैं। लखनऊ में 24 जून को चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में हुई बैठक में एसजीपीजीआई, केजीएमयू, सैफई चिकित्सा संस्थान सहित सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य शामिल हुए। बैठक में सड़क हादसों के बाद तेजी से उपचार सुनिश्चित करने और मृत्यु दर कम करने पर जोर दिया गया। सैफई संस्थान के कुलपति ने कार्ययोजना प्रस्तुत की।
बैठक से लौटे जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि शासन ने तमिलनाडु की तर्ज पर सड़क हादसों के बाद मरने वालों की संख्या तीन साल में 50 प्रतिशत घटाने की योजना बनाई है। इसके लिए लेवल-1 केंद्रों को रीजनल हब बनाया जाएगा जहां अन्य ट्रामा सेंटरों के डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जाएगा। योजना के तहत जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में इंटीग्रेटेड ट्रामा एवं आईसीयू सेंटर बनेगा।