शहरी क्षेत्र में 783 और ग्रामीण क्षेत्र में 567 टीम तैयार
यह अभियान उन ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा, जहां पिछले तीन सालों में कुष्ठ के रोगी पाए गए हैं। 695 गांव और 362 शहरी क्षेत्र संवेदनशील हैं। अभियान के लिए शहरी क्षेत्र में 783 और ग्रामीण क्षेत्र में 567 टीम तैयार की गई हैं। एक टीम में एक आशा कार्यकर्ता और पुरुष कार्यकर्ता शामिल है।
जिला कुष्ठ सलाहकार डॉ. संजय ने बताया कि...
• त्वचा के रंग मे कोई भी परिवर्तन (त्वचा पर लाल रंग या फीके रंग का धब्बा) साथ ही उसमें पूर्ण रूप से सुन्नपन अथवा सुन्नपन का अहसास होता है।
• चमकीली व तैलीय त्वचा।
• कर्ण पल्लव का मोटा होना कर्ण पल्लव पर गांठें/त्वचा पर गांठें।
• नेत्रों को बंद करने में दिक्कत या उससे पानी आना।
• भौहों का खत्म होना।
• हाथों में घाव या दर्द रहित घाव अथवा हथेली पर छाले।
• कमीज या जैकेट के बटन बंद करने में असमर्थता।
• हाथ या पैर की उंगलियां मुड़ तो नहीं गई है।
• फुट ड्रॉप अथवा चलते समय पैर घिसटते तो नहीं हैं।