जीवन में सपने देखना अच्छी बात है लेकिन केवल सपने देखना समय की बर्बादी है।जब भी आप अपने भविष्य को लेकर कुछ सपने देखिए, कोशिश कीजिए कि वह हकीकत में बदले। इसमें आपके सामने चुनौतियां होंगी लेकिन यकीन मानिए डर के आगे ही जीत है। कंपनी का मालिक बनना भी ऐसा ही है। हम सभी बड़ी कंपनियों के मालिक बनने का सपना देखते हैं लेकिन कम लोग ही होते हैं जो उसे हकीकत में बदलने के लिए निकलते हैं। ये बातें रविवार को कानपुर- हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) में प्रोविस्डम ग्रोथ प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर पुनीत रमन ने कहीं।
सपने बड़े हों तो आप एंटरप्रिन्योरशिप पर फोकस करें
सपने बड़े हों तो आप एंटरप्रिन्योरशिप पर फोकस करें
- फोटो : अमर उजाला
वे यहां ई-सेल और आईआईटी बांबे की ओर से आयोजित एंटरप्रिन्योरशिप एनकरेजमेंट विषय पर आयोजित एक दिवसीय वर्कशॉप को संबोधित कर रहे थे। एचबीटीयू के ऑयल टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया परिसर में पुनीत ने एंटरप्रिन्योरशिप स्टूडेंटों को एंटरप्रिन्योरशिप की कई बारीकियां बताईं। बोले, जॉब करना अच्छी बात है लेकिन जब आपके सपने बड़े हों तो आप एंटरप्रिन्योरशिप पर फोकस करिए। पहले कोई नई कंपनी खोलना चाहता था तो उसे तमाम परेशानियां उठानी पड़ती थी लेकिन अब समय बदल गया है।सरकार से लेकर इंडस्ट्री तक हर कोई आपकी मदद को तैयार है। बस जरूरत है आपके एक अच्छे आइडिया की और उसे पूरा करने की क्षमता की।
फेल होने से डरो नहीं, यही आपको आगे ले जाएगा
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फेल होने से डरो नहीं, यही आपको आगे ले जाएगा -पुनीत ने स्टूडेंटों से कहा कि अक्सर यंगस्टर्स फेल होने से डरते हैं। जबकि यह एक सुखद अनुभव होता है। यही एक ऐसी परिस्थिति होती है जब आप ज्यादा सीखने की कोशिश करते हैं। विदेशों में फेल होने वालों को ज्यादा सराहा जाता है। कंपनियां जॉब देने में भी उन्हें प्रियॉरिटी देती हैं। क्योंकि उन्हें मालूम है कि फेल होने वाले बंदे को अधिक अनुभव है। अलर्ट रहने से मिलेगा आइडिया पुनीत ने आइडिया जनरेट करने का तरीका बताया। बोले, जब आप देश और दुनिया की हर हलचल से रूबरू रहेंगे।अपने पढ़ाई पर फोकस करेंगे। अपने आस-पास की जानकारियां रखेंगे तो आपमें अलग-अलग तरह के कई आइडिया आएंगे। अब उनमें से कौन बेहतर होगा इसके लिए आपको मार्केट का रिसर्च करना होगा।
12 टीमों ने बनाया बिजनेस प्लान
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12 टीमों ने बनाया बिजनेस प्लान -वर्कशॉप के तहत पुनीत ने अलग-अलग ब्रांच और ईयर के स्टूडेंटों की 12 टीमें बना दीं। प्रत्येक टीम में सात से आठ स्टूडेंट शामिल थे। सभी एक-दूसरे से अनजान थे इसलिए पहले आधे घंटे उन्हें खुद की टीम का नाम रखने और एक-दूसरे से परिचय करने का समय दिया गया। इसके बाद सभी से बिजनेस प्लान बनाने को बोला गया। इनमें से दस टीमों का चयन आईआईटी बांबे में होने वाले ई-समिट में शिरकत करने के लिए किया गया।