कानपुर। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) मंगलवार से प्रभावी हो रहा है। वर्तमान में न्यूजीलैंड के लिए सबसे ज्यादा उत्पत्ति प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं। एक करोड़ से ज्यादा के करीब चमड़ा और टेक्सटाइल उत्पादों के कन्साइनमेंट देश के अलग-अलग बंदरगाहों पर भेजे गए हैं जो मंगलवार को रवाना किए जाएंगे। ये उत्पाद क्रिसमस के दौरान बिक सकेंगे।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन (फियो) के उत्तर प्रदेश प्रमुख आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि मुक्त व्यापार समझौते से कानपुर की एमएसएमई को खासा लाभ होगा। न्यूजीलैंड को कानपुर समेत देश से चमड़ा उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। कानपुर से 200-300 करोड़ का सालाना कारोबार होता है। अब 20 अक्तूबर से समझौता लागू हो रहा है। इसके लिए निर्यातक कंट्री उत्पत्ति प्रमाण पत्र ले रहे हैं। एक करोड़ के चमड़ा और टेक्सटाइल उत्पाद शहर से देश के अलग-अलग बंदरगाहाें के लिए रवाना किए गए हैं।
पूर्व तक एक महीने में पांच से आठ प्रमाण पत्र जारी होते थे। अब प्रतिदिन आठ प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं। इसमें चमड़ा के उत्पाद और कपड़ा शामिल है। मौजूदा समय में क्रिसमस के उत्पादों जैसे पर्स, बैग, बेल्ट की मांग दिख रही है। उन्होंने बताया कि समझौते से निर्यात दोगुना से ज्यादा बढ़ सकेगा। न्यूजीलैंड से ऊन, लोहा, इस्पात, एल्युमीनियम, कीवी, सेब और सूखे मेवों का आयात होता है। ऐसे में इन उत्पादों की खपत और कानपुर समेत देश भर में बढ़ सकेगी।
आयात-निर्यात विशेषज्ञ जफर फिरोज का कहना है कि न्यूजीलैंड एक अच्छा बाजार है। चमड़ा उत्पादों खासकर पर्स, बेल्ट, बैग आदि की अच्छी मांग है। ऑस्ट्रेलिया के साथ पहले ही मुक्त व्यापार समझौता किया जा चुका है। क्रिसमस के लिए अच्छे ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा ओसेनिया क्षेत्र में शामिल फिजी, पापुआ न्यू गिनी, किरिवाती, समोआ, वनौतु, सोलोमन, नौरु, मार्शल द्वीपसमूह आदि में उत्पादों की मांग दिखेगी।
एक सप्ताह में दिखेगा राहत का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर संभावित प्रतिबंधों और 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला फिलहाल टल दिया है। इससे कानपुर समेत देशभर के निर्यातकों को राहत जरूर मिली है लेकिन अभी 22.50 प्रतिशत टैरिफ अलग-अलग उत्पादों पर लग रहा है। यह टैरिफ पहले 10-11 प्रतिशत तक था। इससे उत्पाद पहले से महंगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है क्रिसमस के बाजार का बड़ा हिस्सा पहले ही चला गया है। हालांकि छोटे-छोटे कन्साइनमेंट जा जरूर रहे हैं लेकिन बड़े ऑर्डर कोई निर्यातक नहीं ले रहा है। अमेरिकी व्यापार नीति में अनिश्चितता के चलते ये स्थिति है। अमेरिका के विदेश मंत्री भारत आ रहे हैं। ऐसे में एक सप्ताह के भीतर राहत का असर दिख सकेगा।