धन्य है ऐसे वीर सपूत को जन्म देने वाली मां, जिसने खुद तो कलेजे पर पत्थर रखने के साथ ही रिश्तेदारों और परिवार वालों को भी आंसू बहाने से रोका। रो रहे रिश्तेदारों से उन्होंने बोला कि बेटे ने शहादत दी है, कोई रोना मत।
विज्ञापन
2 of 7
डेमो पिक
हालांकि जब आखरी बार बेटे का चेहरा भी देखने को नहीं मिला तो रमा पांडेय खुद को रोक नहीं पाईं और ताबूत पर सिर पटककर रो पड़ीं। फिर क्या था, जिनको वह दिलासा दे रहीं थी वे रिश्तेदार और परिवार वाले भी बिलख पड़े।
विज्ञापन
3 of 7
डेमो पिक
दोस्तों ने कहा ‘मुझे दीपक की शादी का इंतजार था। जब भी आता तो इसी पर बात होती कि जल्दी शादी करे और हम सारे दोस्त बारात में खूब मस्ती करें। हमें क्या पता था कि वो ऐसी बारात करवाएगा कि पूरा कानपुर उमड़ पड़ेगा। सोचा नहीं था मेरे यार की बारात ऐसी होगी। यह कहकर दीपक का बचपन का दोस्त आकाश फूट-फूटकर रोने लगा।
4 of 7
डेमो पिक
आकाश के साथ उसके हमउम्र साथी थे और सभी गुमसुम थे और आंखें नम थीं। आकाश तो दीपक की फोटो सीने से चिपकाए लगातार सिसकियां लिए जा रहा था। इंडियन एक्स सर्विसेज लीग के अध्यक्ष कैप्टन योगेंद्र सिंह कटियार और मेजर केके सिंह ने उन्हें समझाया।
विज्ञापन
5 of 7
डेमो पिक
आकाश ने बताया कि वे कक्षा-6 से साथ-साथ पढ़े हैं। बचपन से लेकर जवानी में कदम साथ ही रखा और आपस में हर तरह की बातें होती थीं। दीपक की आदत थी कि जरा सा भी उदास देख ले तो बात पता किए बिना मानता नहीं था।
विज्ञापन
6 of 7
डेमो पिक
पढ़ाई के दौरान तो सब ऐसे ही चलता रहा, लेकिन जब उसकी नौकरी लगी तो हम सभी ने उसे बहुत याद किया। जब भी कोई खुशी का मौका आता और बहुत सारे दोस्त इकट्ठा होते लेकिन दीपक नहीं आ पाता तो हमें अच्छा नहीं लगता।
हमेशा यही सोचकर संतुष्ट हो लेते थे कि जब भी मिलेंगे, हर पल का मजा एक साथ लेंगे। अब ऐसा कभी नहीं हो पाएगा। हमें दीपक के बगैर ही जिंदगी जीनी होगी। शहीद दीपक की अंतिम यात्रा में ऐसी ही तमाम बातों को याद कर दोस्त सिसकियां भरते रहे।