इसके बाद अधिकारी मोटरबोट से नमामि गंगे घाट होकर नगर पालिका में ईओ को दफ्तर पहुंचे। वहां शाम तक निरीक्षण आख्या तैयार की जाती रही। सहायक पर्यावरण अभियंता फरेश कुमार ने बताया कि गंगा में पानी बढ़ने के साथ ही नाले के पानी का बहाव ठहर गया। मछली मरने का कारण क्या रहा, इसका पता लैब से रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। प्रदूषित जल भी मरने का कारण हो सकता है।
फिलहाल कुछ स्पष्ट कहना जल्दबाजी होगी। वहीं जलापूर्ति के वक्त नाले के पानी का तेज बहाव होने के कारण बड़ी संख्या में मछलियां गंगा की धारा में बह गईं। हालांकि हजारों मछलियां अभी भी किनारों पर पड़ी दिख रही हैं। यही नहीं बड़ी संख्या में पक्षी मछलियों को भोजन बनाते दिख रहे हैं।