कानपुर। वीएसएसडी काॅलेज में प्राचार्य के निलंबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्राचार्य प्रो. बिपिन चंद्र कौशिक ने स्वयं के ऊपर वित्तीय अनियमितता के आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि प्रबंधतंत्र ने बिना कोई कारण बताए ही निलंबन पत्र जारी किया है। अब प्रो. कौशिक कानपुर यूनिवर्सिटी प्राचार्य एसोसिएशन (कूपा) के साथ मिलकर छत्रपति शाहूजी महाराज विवि के कुलपति से मिलकर अपना पक्ष रखेंगे।
परिषद ने शुक्रवार को कुलपति से मुलाकात का समय मांगा गया है। उनका आरोप है कि बिना प्राचार्य का पक्ष सुने विवि ने निलंबन का अनुमोदन कर दिया। कूपा पदाधिकारियों ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी निर्णय से पहले दोनों पक्षों को सुना जाना जरूरी है।
वहीं न तो प्रो. कौशिक को कभी इस संबंध में नोटिस जारी किया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया। कूपा महामंत्री प्रो. वीके कटियार ने कहा कि निलंबन नियमानुसार नहीं किया गया है। जिस तरह से नियम और प्रक्रिया को दरकिनार कर निलंबन की कार्रवाई की गई है उससे सभी अनुदानित काॅलेज में शिक्षक-कर्मचारी में भय है। संगठन इसका पुरजोर विरोध करता है। कुलपति से मुलाकात कर इन बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी।
विदेश गई शिक्षिका के अवकाश पर बढ़ा विवाद
महाविद्यालय प्रबंधन और प्राचार्य के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। पिछले वर्ष कॉलेज की एक शिक्षिका मेडिकल अवकाश लेकर विदेश गई थीं। आरोप है कि शिक्षिका ने वहां से चिकित्सा अवकाश की सूचना भेजी जबकि वे कई देशों में घूम रही थीं।
प्राचार्य ने उनका अवकाश स्वीकृत करने से इन्कार कर दिया था, जिसके बाद प्रबंध समिति और प्राचार्य के बीच तनाव बढ़ गया। हालांकि प्रबंधतंत्र के दबाव में आकर प्राचार्य ने वेतन तो स्वीकृत कर दिया लेकिन दस्तावेजों को पूरा करने के लिए जब मेडिकल सर्टिफिकेट मांगा गया तो शिक्षिका टालमटोल करने लगीं। इसके बाद से तनातनी बढ़ती गई।