कानपुर देहात। जिले में धरती माता बचाओ अभियान चलाया जाना है। इसके लिए 350 कृषि आजीविका सखी के बीच 11 महिलाओं को चुनकर कृषि सखी के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह किसानों को रसायनिक खाद की जगह जैविक खाद का उपयोग करने के लिए जागरूक करेंगी। इसके लिए ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जा रहा है।
ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में समूह की महिलाओं के बीच से चुनकर 350 कृषि आजीविका सखी के रूप में प्रशिक्षित की गई हैं। यह किसानों को आधुनिक कृषि करने के गुर सिखाने का काम कर रही हैं ताकि वह खेतों में फसलों की अच्छी पैदावार कर सकें। इसके द्वारा किए जा रहे कार्य के अच्छे परिणाम निकलते देख जिला कृषि विभाग ने 11 कृषि सखी का चयन किया है। यह क्षेत्र के किसानों को समय से फसल की बुआई, सिचाई और फसलों में लगने वाले रोगों की रोकथाम के लिए कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करने की सलाह देंगी। इसके पीछे विभाग का मकसद है कि पुराने पैटर्न पर जैविक खेती की जाए ताकि किसान कृषि उद्यमी बन सकें। इसके लिए इन्हें मासिक पांच हजार रुपये का मानदेय भी दिया जाएगा। साथ ही साल में एक बार दो हजार रुपये मोबाइल रिचार्ज व नेट आदि के खर्च के लिए अतिरिक्त मिलेगा।
उपायुक्त एनआरएलएम गंगाराम वर्मा ने बताया कि इसमें ग्राम पंचायत स्तर पर कमेटी का गठन किया जाएगा। इसमें ग्राम प्रधान, सचिव व कृषि आजीविका सखी शामिल होंगी। इसमें रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करना। अपने खेत और मिट्टी में अधिक से अधिक जैव उर्वरक व कार्बनिक खाद (गोबर की खाद, कम्पोस्ट) का उपयोग करना। कृषि विभाग की सिफारिशों अथवा मिट्टी जांच रिपोर्ट में की गई सिफारिश अनुसार ही रासायनिक, जैव उर्वरक व कार्बनिक खाद का प्रयोग करना जैसी गतिविधियां शामिल रहेंगी। यदि अनुदानित रासायनिक उर्वरकों का अन्य राज्यों में अवैध परिगमन या अन्य कोई अवांछित गतिविधि की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना तुरंत ग्राम पंचायत अथवा संबंधित विभाग के अधिकारियों को दी जाएगी। अभियान में धरती माता की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
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भूमि स्वास्थ्य और सब्सिडी के दुरुपयोग पर लगेगी रोक
कृषि विभाग की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान का दोहरा लक्ष्य है। पहला, किसानों को अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें जैविक तथा प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करना है। इससे मिट्टी का स्वास्थ्य बना रहे। दूसरा सरकार की ओर से किसानों को दिए जाने वाले अनुदानित उर्वरकों के दुरुपयोग को रोकना, ताकि ये उर्वरक औद्योगिक कार्यों या मुनाफाखोरी के लिए दूसरे राज्यों में न भेजे जा सकें।