फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोविंद ने निभाया झींझक के लोगों से किया वादा

विज्ञापन
विज्ञापन
कानपुर देहात/झींझक। तीस साल पहले लोकसभा चुनाव लड़ने के दौरान झींझक की जनता से किया वादा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने खूब निभाया है। जिससे क्षेत्र की जनता में खुशी की लहर है। महामहिम प्रेसिडेंशियल स्पेशल ट्रेन से आज झींझक में आकर लोगों से मुलाकात करेंगे।
विज्ञापन

डेरापुर तहसील के परौख गांव निवासी रामनाथ कोविंद भाजपा के सक्रिय सदस्य बनने के बाद 1991 में घाटमपुर लोकसभा का चुनाव लड़े थे। इसमें कंचौसी बाजार निवासी व डेरापुर चुनाव प्रभारी अरुण सिंह गौर प्रस्तावक बने थे। अरुण सिंह बताते है कि उस दौरान रामनाथ कोविंद ने दो दिन क्षेत्र में रहकर लोगों से मुलाकात की थी।
वह मंगलपुर, छतरसा, झींझक, सिकहिला, कठरा, मिंडाकुआ, कठिका, बान, परजनी आदि गांवों में वोट मांगने गए। नार गांव के नारदाश्रम में पूजन कर महंत से आशीर्वाद लिया था। बाद में औरंगाबाद इंटर कॉलेज में बैठक की। बताया कि गांवों में वोट मांगते समय राष्ट्रपति हमेशा मुस्कराते रहते थे। कानपुर आईटीआई में मतगणना के समय वहां ज्यादा समय नहीं दिया।
विज्ञापन

अपने एजेंटों पर अटूट विश्वास करते थे। घाटमपुर लोकसभा सीट का परिणाम उनके पक्ष में न आने पर वह मायूस हो गए और चुनाव न लड़ने की ठान ली थी। जिस पर उनके परिजनों व चाहने वालों ने साहस बंधाकर राजनीति में सक्रिय रहने को कहा था। चुनाव हारने के बावजूद रामनाथ कोविंद ने क्षेत्र के लोगों से हमेशा स्नेह बनाए रखा। उन्होंने जनता से कहा था कि मैं हार स्वीकार करता हूं, लेकिन समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा आगे आता रहूंगा। उन्होंने यह वादा बाखूबी निभाया है।
अपने कोविंद को एक वक्त भोजन करते देख छलछला गई आंख
कानपुर देहात। अरुण सिंह गौर ने बताया कि राष्ट्रपति को झींझक क्षेत्र की जनता से इतना लगाव रहा कि वह भोजन करना तक भूल जाते थे। वर्ष 1991 में चुनाव लड़ने के दौरान वह हमेशा कहते कि इसी बहाने लोगों से मिलकर लोगों की समस्याएं जानने का मौका मिल रहा है।
चुनाव जीतने के बाद इनका समाधान भी तो कराना है। जिस पर वह भोर होते ही बिना कुछ नास्ता-भोजन किए प्रचार के लिए चले जाते। शाम को वापस लौटने पर सिर्फ एक वक्त भोजन करते। जिस पर उनकी आंख छलछला जाती।
दोस्त के बड़े भाई के स्कूटर से किया चुनाव प्रचार
कानपुर देहात। रामनाथ कोविंद के लोकसभा चुनाव लड़ने के दौरान प्रस्तावक रहे अरुण सिंह गौर ने बताया कि उस दौर में आज की तरह साधन भी नहीं थे। बेहद सरल स्वभाव का होने के चलते रामनाथ कोविंद कंचौसी स्थित उनके घर पर आकर रुके थे।
क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए बड़े भाई रामकुमार का स्कूटर मांगा। जिसे वह खुद चलाकर ले जाते और राष्ट्रपति पीछे बैठते। अरुण सिंह ने बताया कि अपने कोविंद का स्कूटर से जाना अच्छा नहीं लगा। जिस पर दूसरे दिन उन्होंने कानपुर नगर मेें रहने वाले अपने मित्र शैलेंद्र सिंह की जीप मंगाई थी। जिस पर बैठकर गांवों में संपर्क किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें