जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल, सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा व विकास सिंह ने बताया कि चौबेपुर क्षेत्र के बिकरू में 10 जुलाई 2020 को चौबेपुर थाना के उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार मिश्रा, विश्वनाथ मिश्रा, नायब तहसीलदार मय पुलिस टीम वहीं के रहने वाले दयाशंकर अग्निहोत्री के नाम बिकरू के ग्राम पंचायत के सरकारी भवन पर चल रही सरकारी उचित दर की दुकान को दूसरे कोटेदार को चार्ज दिलाने पहुंचे तो वहां पर एक कमरे में बोरों के पीछे सात देसी बम एक डिब्बे में बरामद हुए थे। बम निरोधक दस्ता बुलाकर उसे निष्क्रिय कराया था।
मामले में उपनिरीक्षक विश्वनाथ मिश्रा ने कोटेदार दयाशंकर अग्निहोत्री के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचक ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। अमित मालवीय की एंटी डकैती कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। सोमवार को बचाव पक्ष ने अदालत में दलीलें पेश करते हुए कहा कि आरोपी उचित दर की दुकान पंचायत भवन में नहीं चलाता था। दुकान घर पर चलाता था।
पुलिस ने फर्जी फंसा दिया है। वहीं अभियोजन ने बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपी दयाशंकर अग्निहोत्री बिकरू कांड के कुख्यात अपराधियों में से एक है। 2 जुलाई 2020 की हुई घटना में वह शामिल था। दबंगई के बल पर सरकारी पंचायत भवन में कब्जा कर वहां से राशन बेचता था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दयाशंकर अग्निहोत्री को दोषी करार देते हुए तीन साल कारावास की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए थे सात गवाह
सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत कुमार मिश्रा ने बताया कि मामले की सुनवाई दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों को अदालत में पेश कर गवाही कराई गई। घटना के समर्थन में गवाहों ने बयान दिए जो आरोपी को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण साबित हुए।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला रिपोर्ट रही अहम
शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि मामले में आरोपी की सरकारी उचित दर की दुकान से बरामद देसी बमों को पुलिस ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा था । विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में विस्फोटक देसी बम होने की पुष्टि हुई थी। रिपोर्ट को अभियोजन ने अदालत में पेश की थी। यह सजा दिलाने का मुख्य आधार बना।
बिकरू कांड मामले में तीसरा फैसला
बिकरू कांड से जुड़े मामलों में अदालत का यह तीसरा फैसला है। इससे पहले बिकरू कांड के मुख्य मामले के आरोपी श्यामू बाजपेई को अदालत ने पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला के अपराध में 5 साल के कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं बिकरू कांड से जुड़े तीस आरोपियों पर चल रहे गैंगस्टर के मामले में अभियोजन की मजबूत पैरवी से अदालत 23 दोषियों को दस-दस साल के कारावास की सजा सुना चुकी है। अब इस कांड से जुड़े तीसरे मामले में सजा सुनाई गई है।