दिवाली के मौके पर रोशनी का खूब आनंद लें और आतिशबाजी भी देखें लेकिन थोड़ा सा एहतियात बरतकर। चिकित्सा विशेषज्ञों ने मशविरा दिया है कि आतिशबाजी कम से कम 10 फीट दूर खड़े होकर देखें। इससे पटाखे का शोर कानों तक कम पहुंचेगा और धुआं भी नाक व मुंह की पहुंच से दूर रहेगा।
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खास सलाह यह है कि हवा का बहाव देखकर आतिशबाजी का लुत्फ लें। जिधर हवा चले उसकी विपरीत दिशा में खड़े हों, जिससे पटाखे जलाने से धुआं दूसरी तरफ उड़ेगा।
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मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एसके कटियार का कहना है कि हवा के बहाव के प्रतिकूल खड़ा होने पर धुआं नहीं आएगा। इसके अलावा कपड़ा गीला करके मुंह पर रख सकते हैं और मास्क लगा सकते हैं। इससे भी थोड़ी-बहुत बचत होगी।
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सांस के मरीज घर के अंदर रहें तो बेहतर है। वहीं कान और नाक के बचाव के लिए सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. देवेंद्र लालचंदानी का कहना है कि एक तो तेज आवाज के पटाखे न जलाएं। धमाके से कान का परदा फट सकता है। चक्कर के साथ बेहोशी आ सकती है। फिर भी आतिशबाजी देखते वक्त कान में ईयर गार्ड या रूई लगा लें।
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नाक पर कपड़ा रख लें। वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मलय चतुर्वेदी का कहना है कि जो पटाखा जलाएं, वह इसकी बत्ती में आग लगाने और इसके फटने के बीच की टाइमिंग का ख्याल रखे, जिससे छर्रे, धुआं आंख में न पाए। इसके अलावा अगर गली में कोई पटाखा जला रहा है तो छज्जे पर खड़े होकर आतिशबाजी न देखें। आतिशबाजी खास दूरी बनाकर देखें।
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इन बातों का रखें ध्यान
- पटाखे गली या संकरी जगह न छुड़ाएं।
- आतिशबाजी खुली जगह में करें।
- पटाखे का धुआं आंखों में लगे तो मलें नहीं, पानी से धोएं।
- आंख में चोट लगने पर फौरन नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाएं।
- पटाखे छुड़ाते वक्त बाल्टी में पानी भर कर पास में रखें ।
- हाथ-पैर जलने पर फौरन बाल्टी में डाल दें।
यह हो सकता है खतरा
- नाक और सांस की नली में जहरीली गैस जा सकती है।
- खांसने में व्यक्ति की सांस अटक सकती है।
- अस्थमा, सीओपीडी के रोगियों को अटैक पड़ सकता है।
- हृदय रोगियों को एंजाइना उठ सकता है।
- कान का पर्दा फटने से खून आ सकता है।
- आंखों में स्थायी क्षति होने से रोशनी जा सकती है।