माघी पूर्णिमा का स्नान
ऐसे शुरू हुआ कुंभ
देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन में 14 रत्न निकले थे। इनमें विष भी निकला था, जिसको भगवान शिव ने धारण कर मानव जाति और प्रकृति की रक्षा की थी। इसके बाद अमृत निकला। अमृत के लिए सुर और असुर दोनों में युद्ध होने लगा। तब इंद्र के पुत्र जयंत को अमृत कलश दिया गया और उसकी सुरक्षा का दायित्व सूर्य, चंद्रमा व बृहस्पति को सौंपा गया। कलश ले जाते समय उसकी कुछ बूंदे हरिद्वार में छलकीं। इसलिए पहला कुंभ हरिद्वार में मनाया गया। इसके बाद कुछ बूंदे प्रयागराज में छलकी तब दूसरा कुंभ इलाहाबाद में हुआ। इसके बाद महाकालेश्वर उज्जैन में कुछ बूंदे छलकीं तो तीसरा कुंभ यहां मनाया गया। इसी तरह चौथा कुंभ नासिक में मनाया गया। कुंभ में स्नान नहीं कर सकते तो माघ मास में पवित्र कुंड में करें स्नान