सब इंस्पेक्टर भुनेश्वरी देवी और बेटी भूमिजा की फाइल फोटो
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आइए आज आपको मिलाते हैं यूपी के कानपुर शहर की ‘सुष्मिता सेन’ उपनिरीक्षक भुवनेश्वरी सिंह से। सुष्मिता ने जहां रुपहले पर्दे पर चमक बिखेरने के साथ कम उम्र में ही दो बच्चियों को गोद लेकर एक मिसाल कायम की। वहीं, कोहना थाने की रानीघाट चौकी प्रभारी भुवनेश्वरी सिंह ने भी उन्हीं की तरह एक बच्ची की परवरिश का बीड़ा उठाया है। गोद ली बेटी की परवरिश के कारण उन्होंने शादी नहीं की।
सब इंस्पेक्टर भुनेश्वरी देवी
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चौकी प्रभारी भुवनेश्वरी को हाल ही में रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मूलरूप से अलीगढ़ की रहने वाली भुवनेश्वरी कहती हैं कि 2007 में आगरा के महिला थाने में तैनात थीं। एक रिक्शे वाला चार पांच घंटे की जन्मी बच्ची को लेकर थाने पहुंचा। बच्ची बेहद कमजोर थी। उसका इलाज कराया। करीब डेढ़ महीने तक बच्ची को पाला। जब वह ठीक हो गई तो उसे अनाथ आश्रम में दाखिल किया।
घर लौटी तो मन नहीं लगा। कानों में बच्ची की आवाज गूंजती रही। चार-पांच दिन के बाद उसे देखने अनाथालय पहुंची तो वह काफी रो रही थी। मैंने आवाज दी तो एकदम चुप हो गई। मुझे देखकर मुस्कुराई। उसे छोड़कर वापस घर लौट आई लेकिन मन नहीं लगा। दो दिन फिर अनाथालय पहुंच गई। देखा बच्ची के कमर के नीचे इंफेक्शन हो गया है।
सब इंस्पेक्टर भुनेश्वरी की बेटी भूमिजा
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भुवनेश्वरी कहतीं है कि तभी मैंने बच्ची को अनाथालय से निकालने का फैसला कर लिया। उसका इलाज कराया। उसे गोद लेने का मन बना लिया था। बाल कल्याण मंत्रालय, दिल्ली से आदेश कराया। बच्ची मिलने में मुझे तीन महीने का समय लग गया।
बच्ची गोद देने से पहले शादी न करने की शर्त थी, जिसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। बच्ची इस समय 11 साल की हो गई है। मैंने बच्ची का नाम भूमिजा रखा है। उसके स्कूल के फार्म में माता और पिता दोनों के कॉलम में मेरा ही नाम है। बच्ची को मैंने अपने रिश्ते के बारे में खुलकर बता दिया है और उसे मुझ पर गर्व है।