27 जुलाई को सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण पड़ रहा है। यह तीन घंटे 55 मिनट का होगा। जानकारों की मानें तो इस ग्रहण का असर भारत में छह माह तक रहेगा।
ज्योतिषाचार्य व पं. नरेंद्र दीक्षित बता रहे हैं इस ग्रहण से राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में...
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वाराहमिहिर के अनुसार मकर भारत की लग्न है। ऐसे में पूर्ण चंद्रग्रहण भारत की लग्न पर पड़ेगा। नैसर्गिक राशि मंडल में मकर दशम भाव होगा और उसका स्वामी शनि होगा। ऐसे में पूर्ण चंद्रग्रहण से देश में काफी उथलपुथल होगी। मकर, मेष एवं कर्क राशि वालों पर छह माह तक शनि वक्री रहेंगे।
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ग्रहण के प्रभाव से जनीतिक उथलपुथल, धार्मिक विद्वेष, रक्तपात और प्राकृतिक आपदा जैसी घटनाएं हो सकती हैं। पहला सबसे बड़ा चंद्रग्रहण 1901 में तीन मई को पड़ा था। हालांकि यह भारत में नहीं दिखा था।
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27 जुलाई को सबसे लंबा चंद्रग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र एवं मकर राशि में पड़ रहा है। इसका दुष्प्रभाव विशेष रूप से मेष एवं कर्क राशि वालों पर पड़ेगा।
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चंद्रग्रहण का समय
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चंद्रग्रहण का समय
भारतीय समय के अनुसार रात 11:54 से चंद्रग्रहण प्रारंभ होगा और मध्य रात्रि के उपरांत 3:49 बजे तक रहेगा। इस तरह यह लगभग 3 घंटा 55 मिनट तक रहेगा। इसका सूतक काल दोपहर 12:31 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। इसके बाद भोर में अपने समयानुसार मंदिर के पट खुलेंगे। 27 जुलाई को सुबह की आरती होगी जबकि शयन आरती नहीं होगी।
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ग्रहण में यह करें
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- चांदी के पात्र में जल रखकर उसमें सफेद और काले तिल डालें। ग्रहणकाल में ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: का पाठ करते रहें। ग्रहण के बाद इस जल का छिड़काव पूरे घर में कर दें तथा शेष बचा जल घर के मुख्य द्वार पर डाल दें।
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- ग्रहण के समय काले और सफेद तिल, चावल, गुड़, चना, सफेद वस्त्र एवं गेरुआ वस्त्र एकत्र कर घर के सबसे वृद्ध पुरुष या महिला अपने हाथ से ग्रहण काल के बाद मंदिर में दान करें।
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ग्रहण काल में यह न करें
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- ग्रहण काल में भोजन खाना व पकाना नहीं चाहिए।
- इस दौरान सोना व संजना-संवरना नहीं चाहिए।
- ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को सब्जी काटना, कपड़े सीना से बचना चाहिए।
- ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
- भूलकर भी ग्रहण दर्शन नहीं करना चाहिए।