मानव अंगों का कारोबार पिछले बीस वर्षों से फल-फूल रहा है। लखनऊ के एक डोनर प्रोवाइडर ने 1998 में लखनऊ के रामू पांडेय की किडनी का सौदा कराया था। वह अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है। इसके बाद से मानव अंगों के कारोबार के मास्टर माइंड बदलते गए, काला कारोबार बढ़ता गया।
लखनऊ में रामू और राजा, कानपुर में जुनैद गरीब व मजबूर लोगों को जाल में फांसते गए और गिरोह बनाते रहे। रामू तो दस हजार में ही किडनी का सौदा कर देता था। यह खुलासा पुलिस ने उसे जेल भेजने के बाद किया है।
लखनऊ में हुई थी मुलाकात
पुलिस के मुताबिक किडनी कांड का आरोपी रामू पांडेय लखनऊ के डालीगंज खदरा का रहने वाला है। वह शराब का लती है। बीस साल पहले पैसों के लिए खून बेचा करता था। एक युवक से मुलाकात के बाद उसने 50 हजार रुपये में जालंधर के एक अस्पताल में किडनी निकलवाई थी। इंस्पेक्टर बर्रा अतुल कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक वह 2004 में बांदा केजुनैद व लखनऊ राजा के संपर्क में आया।
10-10 हजार रुपये में भेजता था डोनर
पुलिस के मुताबिक किडनी बेचने के बाद रामू ने लखनऊ में अपना जाल बिछाया था। वह डोनरों को इकट्ठा कर दिल्ली भेजता था। 2013 में वह लखीमपुर निवासी गौरव मिश्रा के संपर्क में आया। तब से वह गौरव और राजकुमार के पास दस-दस हजार रुपये में एक-एक डोनर भेजता रहा।
‘मामले में कई ऐसे डोनर प्रोवाइडर सामने आए हैं, जो बीस साल पहले ही किडनी बेच चुके हैं। उसके बाद वह खुद डोनर उपलब्ध करवा रहे थे। पुलिस मामले की तह तक पहुंचेगी और जो गुनहगार होंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी।’
-
अनंत देव, एसएसपी