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इच्छाधारी नाग-नागिन करते हैं इस मंदिर की रखवाली, नागपंचमी पर लगता है ‘सांपों का मेला’

Fri, 28 Jul 2017 05:27 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
यूपी के कानपुर में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां नागों का मेला लगता है। मान्यता है कि यहां शिव मंदिर की रखवाली खुद इच्छाधारी नाग-नागिन करते हैं। हालांकि किसी ने अाज तक देखा नहीं है। लोगों का मानना है कि नाग और नागिन किसी भी रूप में मंदिर के बाहर हमेशा बैठे रहते हैं।  लोगों का ये भी कहना है कि मंदिर का निर्माण सालों पहले दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने करवाया था।

कानपुर के पटकापुर इलाके में सैकड़ों साल पुराना खेरेपति मंदिर है। सावन के कि‍सी भी एक सोमवार को इच्छाधारी नाग पंचमी के दिन हर हाल में मंदिर के अंदर शि‍वलिंग का दर्शन-पूजन करने जरूर आते हैं। मंदिर के जानकारों का कहना है कि गुरु शुक्राचार्य की बेटी देवयानी का विवाह जाजमऊ के राजा अादित्य से हुआ था। एक बार वह अपनी बेटी से मिलने जा रहे थे।
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कानपुर का खेरेपति मंदिर
खेरपति मंदिर के पास वह कुछ देर तक आराम करने के लिए रुक गए। इस दौरान उनकी आंख लग गई। उन्हें सपने में भगवान शेषनाथ ने दर्शन दिए अौर उस स्थान पर शिव मंदिर बनाने की आज्ञा दी। शेषनाथ ने कहा कि दैत्य गुरु यहां शिवलिंग की स्थापना करवाएं, जिसमें मैं स्वयं वास करुंगा। जागने के बाद शुक्राचार्य ने शेषनाथ की आज्ञा के अनुसार वहां पर शिवलिंग की स्थापना की अौर मंदिर का निर्माण करवाया। इस मंदिर में सावन के महीने में शिवलिंग का भव्य श्रृंगार किया जाता है अौर पूजा-अर्चना की जाती है। 
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खेरेपति धाम मंदिर
कहते हैं कि जब भी यहां के पुजारी मंदिर के कपाट खोलता है तो शेषनाग के शीष पर दो ताजाफूल जरूर चढ़े मिलते हैं। इसके साथ ही भगवान शिव पर भी पूजा साम्रगी अर्पित की हुई मिलती है। पुजारी का यहां तक कहना है कि देर रात मंदिर बंद करने के बाद सारे पुष्प हटा दिए जाते हैं तो फिर सुबह-सुबह कौन आता है जो फूल चढ़ाकर जाता है जबकि मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।  

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डेमो पिक
मंदिर के विषय में कहा जाता है कि एक बार नानाराव पेशवा प्रत्येक सोमवार इस मंदिर में पूजा करने आते थे। एक बार अंग्रेज सेना ने उनका पीछा करते हुए उन्हें घेर लिया। नानाराव बचते हुए खेरेपति शिव मंदिर आए। उनको पकड़ने के लिए जैसे ही अंग्रेज सेना ने मंदिर में कदम रखा उसी समय चारों अोर से सैंकड़ों सांप निकल आए। जिन्हें देखकर अंग्रेजों की सेना वहां भाग गई थी।   
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नागपंचमी पर हर साल इस मंदिर में सांपों का मेला जरूर लगता है। मेले में देश-विदेश के सपेरे अपने सांपों को लेकर यहां आते हैं। इस नाग मेले की बड़ी खासियत ये भी है कि सांपों के विषैले दांत नहीं तोड़े जाते मंदिर के आस-पास किसी की भी आज तक सांप काटने से मौत नहीं हुई है।  
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