करवाचौथ का व्रत शुक्रवार को रखा जाएगा। उदयातिथि के आधार पर यह व्रत कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाएगा। चतुर्थी तिथि नाै अक्तूबर की रात 10:54 बजे से शुरू होगी जो 10 अक्तूबर की रात 7:38 बजे तक रहेगी। अंतरंग फाउंडेशन की संस्थापक ज्योतिषाचार्य स्वाति सक्सेना ने बताया कि करवाचौथ पर इस बार अत्यंत शुभ योग बन रहा है। इस दिन सिद्धि योग शाम 5:41 बजे तक रहेगा। वहीं रोहिणी नक्षत्र शाम 5:31 बजे से प्रारंभ होगा। चंद्रदेव अपनी उच्च राशि वृषभ में और अपने ही रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे जिससे पूजन की शुभता कई गुना बढ़ जाएगी। शाम को चंद्र पूजन के समय ऊं सौम सौमाय नमः मंत्र से अर्घ्य अर्पित करना फलदायी रहेगा। ऐसा करने से सौभाग्य की प्राप्ति, दांपत्य जीवन में मधुरता और रिश्तों में सहजता आती है।
सरगी का होता है विशेष महत्व
ज्योतिष सेवा संस्थान के संस्थापक व अध्यक्ष आचार्य पवन तिवारी के अनुसार व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाने से होती है जो सास अपनी बहू को देती हैं। इसमें फल, मेवे, मिठाई और पराठे शामिल होते हैं। सरगी ग्रहण करने के बाद महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत का समय सुबह 6:19 से रात 8:13 बजे तक रहेगा। कुल अवधि करीब 13 घंटे 54 मिनट की होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:57 से 7:11 बजे तक रहेगा जिसकी अवधि एक घंटा 14 मिनट की होगी।