कानपुर। कार्तिक मास की पूर्णिमा बुधवार को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा वर्ष का सबसे पवित्र और पुण्यदायी दिन माना जाता है। इस दिन किए गए स्नान, दान और दीपदान से पूरे माह किए गए पूजन के समान फल प्राप्त होता है।
ज्योतिष सेवा संस्थान के संस्थापक आचार्य पवन तिवारी के अनुसार इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर कई दुर्लभ योग बन रहे हैं। भद्रावास योग सुबह 8:44 बजे तक रहेगा। इस दौरान भद्रा स्वर्ग लोक में रहेंगी। यह स्थिति अत्यंत मंगलकारी मानी जाती है। सिद्धि योग सुबह से 11:28 बजे तक रहेगा जो हर कार्य में सफलता प्रदान करने वाला है। शिववास योग शाम 6:48 बजे से प्रारंभ होगा। इस योग में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने का विधान है। इन विशेष योगों में स्नान, दान और पूजन से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
त्रिपुरारी पूर्णिमा और देव दीपावली का पावन संगम
ज्योतिषाचार्य दीपक पांडे के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार कर देवताओं को विजय दिलाई थी। यही दिन देवताओं की दीपावली यानी देव दीपावली माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन नदियों, तालाबों या घरों में दीप जलाने से समस्त पाप नष्ट होते हैं और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
ज्योतिषाचार्य स्वाति सक्सेना के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा पर किया गया दान दस यज्ञों के समान फल प्रदान करता है। इस दिन अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से परिवार में समृद्धि और शांति बनी रहती है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन तिल मिलाकर स्नान करने से शनि दोष, पितृ दोष और चांडाल दोष से मुक्ति मिलती है। नदी या तालाब में दीपदान करने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा कर्ज और दरिद्रता का नाश होता है। घर के मुख्यद्वार पर आमपत्रों का तोरण बांधना और दीपावली की तरह दीप प्रज्वलित करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन तुलसी व शालिग्राम की संयुक्त पूजा करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि का संचार होता है। तुलसी पूजन, हवन, जप, तप और यज्ञ करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।