जेल जाने के बाद आर्थिक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि तीन सौ रुपये के लिए एक जेल में बंद एक परिचित के परिजनों से ही ठगी कर ली। इसका खुलासा तब हुआ था, जब परिचित जेल से जमानत पर छूटकर अपने परिजनों से मिला। पता चला कि संतोष ने युवक को जेल में सभी सुविधाएं दिलवाने के नाम पर रुपये ठग लिए थे।
जेल से छूटने के बाद आईपीएस अधिकारी से बढ़ाया मेलजोल
सूत्रों के मुताबिक 1995 में जेल से बाहर आने के बाद संतोष भदौरिया ने शहर में तैनात तत्कालीन एक आईपीएस अफसर से काफी मेलजोल बढ़ा लिया था। इसके बाद उसने प्रॉपर्टी के व्यापार में हाथ डाला। आर्थिक स्थित में सुधार होने के बाद संतोष ने सिविल लांइस में जिलाधिकारी आवास के पास एक फ्लैट भी खरीदा था।
असम में काटा अज्ञातवास
सूत्रों की मानें, तो वर्ष 2002 के बाद अचानक संतोष भदौरिया अज्ञातवास में असम चला गया। वहां दो से तीन साल का समय व्यतीत करने के दौरान उसने पीएचडी की डिग्री हासिल की, जिसके बाद वह डॉ. संतोष भदौरिया हो गया। शहर लौटकर आने के बाद उसने बिधनू में शनिधाम मंदिर की स्थापना की। यहां प्राकृतिक थैरेपी और जैविक खाद का धंधा शुरू किया, जिसमें उसे कोई खास लाभ नहीं हुआ। आज 14 एकड़ में उसका साम्राज्य फैला हुआ है।
अब डिफेंडर समेत अन्य वाहनों से किस्तों में भेजा जा रहा रुपया
सूत्रों की मानें, तो लवकुश आश्रम की एम्बुलेंस से रुपयों को भरकर ठिकाने लगाने की खबर अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद बाबा सतर्क हो चुका है। सुबह एम्बुलेंस तो आश्रम से निकलती है, लेकिन उसमें अब रुपया नहीं होता। इन रुपयों को अब डिफेंडर कार और अन्य वाहनों से किस्तों के रूप में ठिकाने लगाया जा रहा है।
बाबा के 62 भक्तों ने थाने में दिया प्रार्थनापत्र
बाबा के 62 भक्तों ने शनिवार को अपने प्रार्थनापत्र बिधनू थाने में भिजवाया। भक्तों ने नोएडा के डॉ. सिद्धार्थ चौधरी पर करौली सरकार डॉ. संतोष भदौरिया पर एक चैनल में डिबेट के दौरान अपशब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगाया है। कार्यवाहक थाना प्रभारी मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच के बाद कार्रवाई होगी।