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UP: कानपुर के चमड़ा उत्पादों की स्विटजरलैंड और नार्वे में बढ़ेगी चमक, इनके साथ हुआ है मुक्त व्यापार समझौता

Wed, 23 Jul 2025 02:54 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: मुक्त बाजार समझौता होने से आयात और निर्यात शुल्क कम हो जाएगा। पहले चमड़ा और चमड़ा उत्पादों पर 16 प्रतिशत शुल्क लगता था। जानकारों का कहना है समझौता से निर्यात दोगुना होने की संभावना है। नार्वे को 50-100 करोड़ का निर्यात होता है।
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असद इराकी, यादवेंद्र सचान, आलोक श्रीवास्तव और जफर फिरोज - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के तहत स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन के साथ सरकार समझौता कर चुकी है। इसी तरह 24 जुलाई को यूनाइडेट किंगडम (यूके) के साथ व्यापार समझौता की घोषणा की जानी है। इन समझौतों के बाद कानपुर के चमड़ा उत्पादों की चमक और बढ़ने की उम्मीद है। निर्यात दोगुना होने का अनुमान है। अभी अकेले यूके को 3000 हजार करोड़ का वार्षिक निर्यात होता है। स्विटजरलैंड भी अच्छा बाजार है। यहां 150-200 करोड़ का निर्यात किया जाता है।

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यूरोपीय संघ के चार देशों के साथ करार से यूरोपीय यूनियन के शेष अन्य देशों में भी कारोबारी गतिविधियां बढ़ सकेंगी। खासकर जर्मनी को बड़े बाजार के रूप में देखा जा रहा है। भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता 2022 में शुरू हुई थी, जिस पर अब सहमति बन गई है। अगले एक दो वर्ष में बाजार हिस्सा भी बढ़कर 10 प्रतिशत होने की उम्मीद है। कानपुर समेत देश के पास अब कंबोडिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान और तुर्किए के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करने के लिए मूल्य निर्धारण किया जा सकेगा।

चमड़ा और चमड़ा उत्पादों पर लगता था 16 प्रतिशत शुल्क
2024 में यूनाइटेड किंगडम को किए गए निर्यात की हिस्सेदारी 5.7 थी। इसकी तुलना में चीन की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत, वियतनाम की 18 प्रतिशत, तुर्किए की 1.8 प्रतिशत थी। पाकिस्तान और बांग्लादेश की हिस्सेदारी 0.5 प्रतिशत रही। जानकारों का कहना है कि मुक्त बाजार समझौता होने से आयात और निर्यात शुल्क कम हो जाएगा। पहले चमड़ा और चमड़ा उत्पादों पर 16 प्रतिशत शुल्क लगता था। जानकारों का कहना है कि स्विटजरलैंड अच्छा बाजार है। यहां पर सालाना 150-200 करोड़ की सैडलरी, बेल्ट, पर्स और जूतों का निर्यात किया जाता है। समझौता से निर्यात दोगुना होने की संभावना है। नार्वे को 50-100 करोड़ का निर्यात होता है।

यूरोपीय यूनियन के बाजार में बढ़ सकेगा दखल
यूके पहले यूरोेपीय यूनियन (ईयू) में शामिल था। कई वर्षों पहले वह यूरोपीय यूनियन से अलग हो गया। यूरोपीय केंद्रित क्षेत्र में ऑस्ट्रिया, अजरबैजान, बेल्जियम, बुल्गारिया, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, कजाकिस्तान, लिकटेंस्टीन लिथुआनिया, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्पेन, स्वीडन, स्विटजरलैंड, तुर्किए हैं। यूके से समझौते का असर इन देशों पर भी पड़ेगा। यूरोपीय यूनियन में चमड़ा और चमड़ा के उत्पाद, खाद्य पदार्थों का बहुत बड़ा बाजार है। नए-नए फैशन के ट्रेंड इटली, फ्रांस से निकलते हैं। इसका सीधा लाभ कानपुर के निर्यातकों को मिल सकेगा।

यूरोप के चार देशों के साथ समझौता हो चुका है और यूके के साथ 24 को समझौता होने की घोषणा की जानी है। ये समझौता कानपुर समेत देश भर के चमड़ा और चमड़ा उत्पादों के लिए बेहतर परिणाम लेकर आएगा। बाजार हिस्सेदारी आने वाले एक से दो वर्षों में दोगुना हो सकेगी।  -असद इराकी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद

स्विटजरलैंड और यूके सैडलरी के साथ ही बेल्ट, पर्स, बैग के बड़े बाजार हैं। यूके में फुटवियर और शेफ्टी शूज की भी बहुत मांग है। निश्चित तौर पर बाजार बढ़ेगा। नए-नए ब्रांडों के लिए बाजार खुलेगा। नई व्यवस्था से निर्यात बढ़ सकेगा।  -यादवेंद्र सचान, सदस्य, चर्म निर्यात परिषद और निर्यातक

ईएफटीए और यूके के साथ एफटीए मील का पत्थर साबित होगा। इससे यूके में उत्पादों की मांग और बढ़ सकेगी। इसके अलावा यूरोपीय यूनियन के देशों में कानपुर के उत्पादों की पहुंच और बढ़ सकेगी। एक बहुत बड़ा बाजार मिल सकेगा।  -आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन
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कानपुर की सैडलरी की मांग फिर से बढ़ने लगी है। मुक्त बाजार समझौता होने से उत्पाद की लागत कम हो जाएगी। इससे निर्यात कई गुना बढ़ सकेगा। यूके और यूरोपीय यूनियन सैडलरी का बहुत अच्छा और बड़ा बाजार है। -जफर फिरोज, आयात-निर्यात विशेषज्ञ
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