इस बीच हल्की बारिश भी हो सकती है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एसएन सुनील पांडेय का कहना है कि कानपुर आते-आते हल्की फुहारें ही रह जाएंगी। उनका कहना है कि जिस तरह से गर्मी पड़ रही है, उससे राहत के लिए 15 से 20 मिमी बारिश की आवश्यकता है।
मानसून के पहले आने का है संकेत
इतनी बारिश फिलहाल संभव नहीं दिख रही है। इतना जरूर है कि भीषण गर्मी के बाद आ रहे बादल मानसून के पहले आने का संकेत जरूर दे रहे हैं। बुधवार को बंगाल की खाड़ी की नमी लेकर आने वाली हवाएं जैसे ही वातावरण की ऊपर सतह पर पहुंचीं।
उमस भरी गर्मी ने किया बेहाल
दिन का अधिकतम पारा दो डिग्री नीचे आ गया, लेकिन उमस भरी गर्मी ने शहरियों को बेहाल कर दिया। तापमान से अधिक गर्मी लोगों ने महसूस की। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. पांडेय ने बताया कि बंगाल की खाड़ी की नमी की वजह से ऊंचे बादल बन गए।
12 जून की रात से मौसम में बदलाव आने की संभावना
ऊंचे बादलों से बारिश नहीं होती, लेकिन धूप कमजोर हो जाती है। इससे तापमान नीचे गिरता है। ऊंचे बादल जमीन से छह हजार फीट की ऊंचाई पर रहते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे नमी बढ़ेगी, बादल घने होते जाएंगे। 12 जून की रात से मौसम प्रणाली में तेजी आने की संभावना है।
कानपुर क्षेत्र में अधिकतम तापमान
- बांदा- 44.8 डिग्री
- कानपुर- 43.4 डिग्री
- इटावा- 43.2 डिग्री