इससे उत्तर-पूर्वी हवाएं 13.7 की गति से बह रही हैं। इसके साथ ही बादलों का जमावड़ा लगा है, जिससे बारिश की स्थिति बनी हुई है। गुरुवार को दिनभर रुक-रुककर रिमझिम के साथ तेज बारिश हुई है। सीएसए के कृषि मौसम तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि मानसून पूरी तरह अभी सक्रिय है। ये मानसून की वापसी के लक्षण नहीं हैं। उन्होंने बताया कि माहौल में नमी 90 प्रतिशत से अधिक है। इससे स्थानीय स्तर पर बारिश होती रहेगी। इसके साथ अंधड़ भी चलेंगे।
जलवायु परिवर्तन से हो रही रेन शिफ्टिंग
जलवायु परिवर्तन की वजह से रेन शिफ्टिंग होने लगी है। तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि मानसून के लौटने की तिथि 20 सितंबर है। 10 सालों में मानसून ज्यादातर सितंबर में ही लौटा है। फर्क बारिश के समय में आया है। पहले जून में मानसून आता रहा और भरपूर बारिश जुलाई और अगस्त के पहले पखवाड़े में होती रही है, लेकिन अब बारिश अगस्त और सितंबर के बीच होती है।
छोटी ऋतुओं की अवधि सिमट जाएगी
इस बार एक दिन में सबसे अधिक बारिश 19 अगस्त को 62.2 मिमी हुई है। उनका कहना है कि पूरे मानसून सत्र के बारिश की मात्रा में बहुत अधिक फर्क नहीं है। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि रेन शिफ्टिंग के कारण संक्रमण काल की अवधि घटी है। इसे बारिश, जाड़ा और गर्मी के बीच में पड़ने वाली छोटी ऋतुओं की अवधि सिमट जाएगी।
फसलों पर असर
चंद्रशेखर आजाद कृषि एंव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, सीएसए के कृषि विज्ञान केंद्र दलीपनगर के वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने लगातार हो रही बारिश को देखते हुए किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि उड़द, मूंग, तिल, सब्जियां, सोयाबीन, मूंगफली, बाजरा, मक्का, ज्वार, धान आदि फसलें खेतों में खड़ी हैं। खेतों में जलनिकासी का उचित प्रबंधन करें। किसी भी हाल में खेतों में पानी न भरने दें।
धान को फायदा, इन फसलों को होगा नुकसान
कानपुर देहात के जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि धान की फसल को यह बारिश फायदेमंद है। बीते एक सप्ताह से बारिश न होने के चलते धान की फसल सूख रही थी। गुरुवार की बारिश के बाद खेत पानी से लबालब हो गए है। ऐसे में एक सप्ताह तक बारिश की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हालांकि अगेती फसलों में तैयार हो रही मक्का, ज्वार, बाजरा के साथ तिलहनी फसलों व सब्जियों के लिए तैयार हो रही पौध को नुकसान हुआ है। मक्का, ज्वार, बाजरा के खेत में पानी ठहरने न दे। अधिक पानी होने पर निकाल दें।