20 सालों में सबसे ठंडी 12 दिसंबर की रात रही है। हिमालय की बर्फबारी और बारिश तथा जेट स्ट्रीम की लाई नमी जब वातावरण में समाई तो न्यूनतम तापमान 24 घंटे में 3.4 डिग्री सेल्सियस नीचे गिर गया। इसके पहले वर्ष 2004 में 12 दिसंबर को न्यूनतम तापमान 4.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। माहौल में नमी समाने से गलन बढ़ गई। सीएसए के मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दो दिनों में ठंडक और बढ़ेगी। उत्तर पश्चिमी हवाओं की निरंतरता बनी हुई है। हवाएं बराबर नमी ला रही हैं। बादल अगर आए तो दिन का तापमान भी लुढ़केगा।
समुद्री हवाएं जेट स्ट्रीम और हिमालय की पर्वतीय श्रंखलाओं पर हो रही बर्फबारी उत्तर पश्चिमी हवाओं में नमी बढ़ा रही है। इससे कानपुर परिक्षेत्र समेत पूरे प्रदेश में गलन बढ़ गई है। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि उत्तर पश्चिमी हवाओं की निरंतरता के साथ जब तक जेट स्ट्रीम नीचे बनी रहेंगी। हवाओं में नमी और ठंड बढ़ती रहेगी। इसके साथ ही हिमालयी बर्फबारी से ठंड का प्रभाव मैदानी इलाकों में आएगा। इसकी वजह से रात का तापमान नीचे गिरा है। अभी इसके और नीचे आने की संभावना है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बना है।
इसके चक्रवाती घेरे के असर से हल्के बादल आएंगे। इनकी वजह से कानपुर परिक्षेत्र में बारिश तो नहीं होगी लेकिन बादल आ सकते हैं। इसकी वजह से धूप हल्की हो जाएगी और अधिकतम तापमान गिरेगा। गुरुवार को दिन में धूप निकलने पर अधिकतम तापमान सामान्य औसत के बराबर रहा है। लेकिन ठंडी हवाओं की वजह से माहौल में गलन बनी रही। इसके साथ ही क्षोभ मंडल में एक पश्चिमी विक्षोभ बना हुआ है। इसका भी हल्का असर आ रहा है। सीएसए के मौसम विभाग के तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि हवाओं की निरंतरता की वजह से अभी ठंड और बढ़ने का अनुमान है। माहौल में धुंध कम हुई है। सुबह दृश्यता 1300 मीटर रही है। 24 घंटे में माहौल में नौ फीसदी बढ़ी है। नमी 92 फीसदी है। हवाओं की रफ्तार जितनी बढ़ेगी, ठंड उतनी तेज होगी।
तापमान
अधिकतम- 24 डिग्री सेल्सियस
न्यूनतम- 5.4 डिग्री सेल्सियस
फसलों पर पाला गिरने का खतरा
सीएसए के मौसम तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि दो-तीन में ठंडक के साथ पाला भी गिर सकता है। इससे फसलों को नुकसान होगा। किसानों को सलाह दी जाती है कि खेत में हल्की सिंचाई करके नमी बनाए रखें। इसके साथ ही अगर संभव है तो फसलों के पास खेत के किनारे धुआं कर दें। उन्होंने बताया कि ठंड में फसलों के पौधों पर बर्फ की हल्की पर्त जम जाती है। इसे पाला कहते हैं। इसके असर से पौधों की नसें सूख जाती हैं। पत्तियां पीली और काली पड़कर झड़ जाती हैं।