प्रिंटिंग प्रेस मालिक की जमानत को बना रहे थे आधार
पिछले दिनों अपर जिला जज 18 की अदालत से प्रिंटिंग प्रेस मालिक शंकर लाल रमानी को जमानत मिल गई थी। शंकर पर अपनी प्रिंटिंग प्रेस में बंदी से संबंधित पम्पलेट छापने का आरोप था। इसी आदेश को आधार बनाकर मामले में अन्य आरोपियों ने जमानत अर्जियां दाखिल करनी शुरू कर दी थीं। मो. आमिर और मो. उमर ने भी इसी आदेश का हवाला देते हुए जमानत की मांग की लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए तर्क खारिज कर दिया कि मामले में शंकर की भूमिका अन्य आरोपियों से अलग थी। वह बवाल में शामिल नहीं था। आमिर और उमर पर गंभीर आरोप हैं इसलिए इन्हें शंकर के जमानत आदेश का लाभ नहीं मिल सकता।
बेकनगंज थाने में दर्ज हुई थीं तीन एफआईआर
3 जून को हुए बवाल के अगले दिन सबसे पहले 3:50 बजे बेकनगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक नवाब अहमद ने 36 नामजद व 450 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद शाम 5:36 बजे परेड निवासी मुकेश ने हजारों की भीड़ में अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। तीसरी रिपोर्ट बेकनगंज एसआई आरिफ रजा ने 19 नामजद व 350 अज्ञात लोगों के खिलाफ शाम 6:30 बजे दर्ज कराई थी। लगभग 80 जमानत अर्जियां कोर्ट में दाखिल की जा चुकी हैं।
वृद्ध को भी नहीं मिली गिरफ्तारी से राहत
नई सड़क पर बवाल के मामले में आरोपी 68 वर्षीय वृद्ध फहीमाबाद लेबर कालोनी निवासी सैयद अब्दुल हई हाशमी को गिरफ्तारी से राहत नहीं मिल सकी है। अपर जिला जज 16 जितेंद्र द्विवेदी ने बवाल से संबंधित तीनों मुकदमों में आरोपी अब्दुल की अग्रिम जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। अब्दुल की ओर से अधिवक्ता का तर्क था कि एफआईआर में अब्दुल नामजद नहीं है। वहीं, एडीजीसी दिनेश अग्रवाल व विशेष लोक अभियोजक पंकज त्रिपाठी ने तर्क रखा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अब्दुल की पहचान हुई है। अब्दुल ने सहअभियुक्तों के साथ मिलकर जनता व पुलिस बल पर पथराव, फायरिंग व पेट्रोल बमों से हमला किया।