कानपुर हिंसा के मुख्य आरोपी
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इसके अलावा बाबूपुरवा निवासी इकलाख मिर्जा नाम का शख्स कारोबारी है। सूत्रों के मुताबिक यह दोनों पीएफआई के सीधे संपर्क में हैं। इसके जरिये हयात भी संपर्क में था। यह खुलासा जांच में हुआ है। सर्विलांस के जरिये इससे संबंधित कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
शहर में हैं कई पीएफआई सदस्य और पदाधिकारी
सूत्रों के मुताबिक लोकल पीएफआई सदस्यों के संपर्क में निजाम व इकलाख हैं। इनके बारे में पुलिस और जानकारी जुटा रही है। पुलिस पीएफआई के पूरे नेटवर्क को तलाशने में जुटी है। संभव है कि इसमें पुलिस के साथ एटीएस भी बड़ी कार्रवाई करे। सीएए हिंसा में बाबूपुरवा पुलिस ने पीएफआई के पांच सदस्यों को जेल भेजा था। पुलिस उनके बारे में भी जानकारी जुटा रही है। हालांकि निजाम व इकलाख जिनके संपर्क में हैं वह दूसरे लोग हैं। जल्द इन पर नकेल कसी जाएगी।
इसलिए एक तरह से हुआ बवाल
जिस दिन शहर में बवाल हुआ था उसी दिन पश्चिम बंगाल और मणिपुर में भी पीएफआई ने बंदी की कॉल की थी। इसी तरह से वहां भी बवाल हुआ था। एमएमए जौहर फैंस एसोसिएशन की तरफ से जो बाजार बंदी का आवाहन किया गया था वह भी उसी तर्ज पर था। अब जब पीएफआई से कनेक्शन जुड़ने लगा तो स्पष्ट हो रहा है कि कहीं न कहीं एक तरह साजिश के पीछे पीएफआई का हाथ है। हालांकि बाकी तथ्य जांच पूरी होने तक सामने आएंगे।
नई सड़क पर जांच करते एटीएस के अधिकारी
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एटीएस अपने स्तर से जुटा रही जानकारी
पीएफआई कनेक्शन के आने के बाद से ही एटीएस भी सक्रिय हो गई थी। कई संदिग्ध लोगों को चिन्हित किया है। मोबाइल नंबर भी सर्विलांस पर लगाए हैं। पीएफआई संबंधी तमाम जानकारी एटीएस जुटा रही है। उधर पुलिस पुराने शातिर अपराधियों की तलाश में जुटी है। तमाम अपराधी नाम बदलकर रहने लगते हैं, उनका भी ब्योरा खंगाला जा रहा है।