पिछले साल रिटायर्ड मेजर जनरल के माल रोड स्थित मकान पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और फेक बिल के जरिए कब्जे का प्रयास हुआ था। पुलिस ने जब मामले की जांच की तो भूमाफियाओं के साथ तीन अन्य अधिवक्ताओं के नाम भी सामने आए हैं। इसमें दीनू उपाध्याय, धीरज व उनके भाई नीरज दुबे शामिल हैं।
हरबंशमोहाल पुलिस ने रिटायर्ड मेजर जनरल सरदार हरवीर सिंह की तहरीर पर पांच दिसंबर 2024 को सिविल लाइंस निवासी कमलेश सिंघट, आरके शर्मा, केडीए कॉलोनी निवासी फहीम अहमद, शकील अहमद, कराची खाना निवासी रामचंंदर समेत छह अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि मामले में जांच की तो एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया। यह फुटेज उन लोगों को है जो रिटायर्ड सैन्य अफसर के मकान पर कब्जा करने गए थे। इसमें धीरज दुबे और नीरज दुबे के नाम सामने आए। यह दोनों अधिवक्ता बताए जा रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज में दीनू उपाध्याय नहीं है। पुलिस के मुताबिक दीनू लगातार धीरज और नीरज से फोन के माध्यम से संपर्क में था। इसी आधार पर तीनों का नाम मुकदमे में जोड़ा गया है।
विवेचना करने वाला एसआई निलंबित
अधिकारियों के मुताबिक मामले की प्रारंभिक विवेचना उप निरीक्षक सुरेश चंद्र शर्मा ने की थी। उन्होंने अपने कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतते हुए नामजद व प्रकाश में आए अभियुक्तों को अनुचित लाभ पहुंचाया तथा महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी करते हुए प्रकरण में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी थी। इसे गंभीरता से लेते हुए सुरेश चंद्र शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।