साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर)
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कानपुर में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर इंश्योरेंस के प्रीमियम में छूट के बहाने लोगों से ठगी करने वाले गिरोह ने ग्राहकों का डाटा टेलीकॉम कंपनियों से खरीदा है। यहीं से मिले डाटा के आधार पर ये लोग ग्राहकों को फोन करते और अपनी बातों में उलझाकर पैसा ट्रांसफर करवा लेते।
इनके पास नाम, पता, मोबाइल नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां होने की वजह से ग्राहक शक भी नहीं करते और लालच में आकर पैसा ट्रांसफर कर देते थे। पुलिस ने डाटा बेचने वाले एक शख्स की पहचान कर ली है। मामले में टेलीकॉम कंपनी से जानकारी मांगी गई है। सत्यापन के बाद उसकी गिरफ्तारी की जाएगी।
लखनऊ और बाराबंकी की फर्जी आईडी से खरीदे सिम
गुरुवार को गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों के पास से करीब दो दर्जन सिम बरामद हुए थे। ज्यादातर सिम लखनऊ और बाराबंकी के पते के हैं। ये फर्जी आईडी पर खरीदे गए हैं। अब तक एक दर्जन सिमकार्ड के बारे में पता चला है।
एडीसीपी क्राइम दीपक भूकर ने बताया कि पुलिस ने जब पहचान में आए लोगों से पूछताछ कि तो उन्होंने इन मोबाइल नंबरों को जारी कराने से इनकार किया है। मामले में क्राइम ब्रांच ने नोएडा और गाजियाबाद पुलिस से भी संपर्क किया है। उनका दावा है कि इन शहरों में भी इस तरह का अपराध हुआ है। ऐसे में आशंका है कि कहीं इसी गिरोह का हाथ तो नहीं है।
कैनोपी से लेते थे सिम कार्ड, बिचौलिये की तलाश
एडीसीपी ने बताया कि पकड़े गए जालसाज दुकान से नहीं कैनोपी लगाकर बेचने वालों से सिमकार्ड खरीदते थे। इसके लिए ये खुद न जाकर दूसरे को भेजा करते थे। पुलिस ने फर्जी आईडी पर सिमकार्ड खरीदकर लाने वाले की जानकारी कर ली है। जल्द ही पकड़ा जा सकता है।