किशोर एक महीने से बीमार था, लेकिन उसकी न तो जांच हुई और न ही बीमारी का पता चला। सवाल उठता है कि आखिर इतना भीषण दर्द उसे किन कारणों से हो रहा था। सीएचसी प्रभारी डॉ. अविनाश यादव का कहना है कि सोमवार को वह इमरजेंसी में आया था। शुरुआती लक्षण ऐसे नहीं थे कि तत्काल जांच कराई जाए।
कानपुर में कल्याणपुर स्थित राजकीय बाल संरक्षण गृह में मंगलवार को मानसिक बीमार किशोर ने पेट दर्द से कराहते हुए दम तोड़ दिया। बताते हैं किशोर एक महीने से बीमार था। हमेशा की तरह सोमवार को उसके पेट में दर्द उठा। उसे बुखार था और उल्टियां भी हो रही थीं।
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इस पर उसे कल्याणपुर सीएचसी में दिखाया गया। डॉक्टरों ने बुखार, पेट दर्द और उल्टी रोकने की दवा दी। थोड़ी देर बाद पेट दर्द कम होने पर उसे वापस ले जाया गया। बताते हैं कि रात में उसे फिर से पेट में दर्द शुरू हुआ तो सीएचसी से मिली दवाएं खिला दी गईं, लेकिन आराम नहीं मिला।
मंगलवार सुबह पेट में इतना भीषण दर्द हुआ कि वह बार-बार बेहोश भी हो जा रहा था। हालत बिगड़ने पर ड्यूटी प्रभारी विजय कुमार उसे फिर कल्याणपुर सीएचसी लेकर गए। वहां डॉक्टरों ने किशोर को मृत घोषित कर दिया। बताते हैं कि किशोर एक महीने से बीमार था, लेकिन उसकी न तो जांच हुई और न ही बीमारी का पता चला।
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सवाल उठता है कि आखिर इतना भीषण दर्द उसे किन कारणों से हो रहा था। सीएचसी प्रभारी डॉ. अविनाश यादव का कहना है कि सोमवार को वह इमरजेंसी में आया था। शुरुआती लक्षण ऐसे नहीं थे कि तत्काल जांच कराई जाए।
निश्चित रूप से उसे पहले से कोई परेशानी रही होगी। बाल संरक्षण गृह के कर्मचारी उसकी पहले की हिस्ट्री बताते तो जांच कराते। बताया गया कि किशोर को अगस्त 2019 में लखनऊ से यहां शिफ्ट किया गया था। वह चाइल्ड लाइन संस्था को लखनऊ में भीख मांगते हुए मिला था। यहां आने के बाद भी वह एक-दो बार बीमार हुआ, लेकिन वह ठीक हो गया था।
जब भी बीमार पड़ा, दवा से ठीक हो गया। इससे जांच की जरूरत ही महसूस नहीं हुई। सोमवार को अचानक से तबीयत खराब हुई, जो बिगड़ती चली गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। बालगृह में लगे सीसीटीवी फुटेज देखे गए हैं। दवा देने में कोई लापरवाही नहीं हुई। - रामकृष्ण अवस्थी, प्रभारी बाल संरक्षण गृह