दोनों के खिलाफ दर्ज की थी रिपोर्ट
उमाशंकर ने उन्नाव में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत शारदानगर निवासी लक्ष्मीनारायण कटियार को भागीदार बताया था, जिसके बाद पुलिस ने जूही थाने में उमाशंकर और लक्ष्मीनारायण के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। बाद में लक्ष्मीनारायण की नामजदगी गलत पाते हुए विवेचना के बाद उमाशंकर वाजपेई और महेशचंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।
दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई हुई
महेशचंद्र की इस दौरान मौत हो गई। जूही थाने में 1992 में रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा जनवरी 1993 में उमाशंकर के खिलाफ एक परिवाद भी कोर्ट में दाखिल कर दिया गया। जुलाई 2009 में मामला सेशन कोर्ट पहुंचा। दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई हुई।
संदेह का लाभ देते हुए उमाशंकर को बरी कर दिया
इस दौरान ड्रग इंस्पेक्टर के साथ ही ज्यादातर गवाहों की मौत हो चुकी थी, जो दो गवाह बचे थे वह पुलिस के ही थे। अभियोजन ने इन्हें ही अदालत में पेश किया, लेकिन यह गवाह भी अभियोजन की कहानी को कोर्ट में साबित नहीं कर सके। इस पर कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए उमाशंकर को बरी कर दिया।