सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में खेलकूद को बढ़ावा देने और युवाओं की प्रतिभा निखारने के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन धरातल पर योजनाएं किस तरह दम तोड़ रही हैं। इसकी बानगी घाटमपुर के पतारा ग्राम पंचायत में साफ देखी जा सकती है। यहां बना खेल का मैदान जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
हालात यह हैं कि आधे से ज्यादा ग्रामीणों को यह तक जानकारी नहीं है कि उनके गांव में कोई खेल का मैदान भी स्थित है। ग्रामीणों के अनुसार, पतारा ग्राम पंचायत में खेल के मैदान के नाम पर महज औपचारिकता पूरी करते हुए सिर्फ बाउंड्री वॉल (दीवार) खड़ी करके छोड़ दी गई। मैदान बने हुए करीब चार साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक इस पर एक भी खेल गतिविधि या बच्चों का अभ्यास नहीं हुआ है।