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Kanpur Sikh Riots: इंसाफ की आस खत्म सी थी, दंगा पीड़ित बोले- उम्मीद टूट गई थी, लेकिन अब न्याय होगा

Thu, 16 Jun 2022 05:44 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए सिख दंगे में 38 साल बाद हुई गिरफ्तारियों से सिख समाज में खुशी की लहर है और न्याय की उम्मीद बढ़ी है। सिख समुदाय को अब पूरा भरोसा है कि 1984 दंगे के अभियुक्तों को सजा जरूर मिलेगी।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर सिख दंगे के पीड़ित सीधे तौर पर सामने आने को तैयार नहीं है। मगर उन्होंने एसआईटी के अफसरों से आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर बातचीत की। इसमें उन्होंने कहा कि तीन दशक से अधिक समय बीत चुका था। हर उम्मीद टूट चुकी थी और आस भी खत्म हो गई थी लेकिन जिस तरह से एसआईटी ने कार्रवाई कर आरोपियों को जेल भेजा उससे यकीन होने लगा है कि अब न्याय होगा। 

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दरअसल एसआईटी ने केस के वादी और गवाहों की पहचान सार्वजनिक नहीं किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान भी पीड़ित सामने नहीं आए। एसआईटी के अफसरों ने उनसे बातचीत की और आरोपियों की गिरफ्तारी के बारे में जानकारी दी। एसआईटी के अफसरों ने बताया कि पीड़ितों का कहना था कि जब जांच की शुरुआत हुई थी तब भी उनको लगता था कि कुछ खास कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन, एक आस जरूर बंध गई थी।

इसलिए एसआईटी की कार्रवाई में वह सहयोग करते रहे। जब आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी मिली, तो वह भी भावुक हो गए। उनका यही कहना था कि तीन दशक पहले जो नाइंसाफी हुई थी। अब उसमें इंसाफ होने की उम्मीद जाग गई है। 
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दरोगा की मेहनत रंग लाई, 62 आरोपियों को किया बेपर्दा
निराला नगर वाले केस की विवेचना दरोगा सूर्य प्रताप सिंह कर रहे हैं। सूर्य प्रताप के पास इसके अलावा चार और केस हैं। उनके सभी केसों को मिलाकर कुल आरोपियों की संख्या 62 हैं। जबकि जिनकी गिरफ्तारी होनी है उनकी संख्या 74 है। इससे साफ है कि सूर्य प्रताप सिंह ने किस कदर मेहनत विवेचना के दौरान की। एक एक आरोपी को खोजा। उनके खिलाफ सक्ष्य जुटाए।
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