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कानपुर: निर्माण से पहले गिरी 70 साल पुराने मकान की छत, मलबे में दबकर किसान और मवेशी की मौत

Fri, 08 May 2026 12:30 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: बिधनू थाना क्षेत्र के कठारा गांव में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में 70 साल पुराने मकान के बरामदे की छत भरभराकर गिर गई। मलबे में दबने से किसान श्रवण सिंह चंदेल (65) और एक भैंस के बच्चे की मौत हो गई।
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जर्जर मकान का गिरा पड़ा मलबा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कठारा गांव में शुक्रवार सुबह एक जर्जर मकान की छत गिर जाने से 65 वर्षीय बुजुर्ग किसान और उनके एक पालतू मवेशी की दर्दनाक मौत हो गई। विडंबना देखिए कि जिस जर्जर हिस्से को गिराकर नया निर्माण शुरू होना था, वही हिस्सा गिरने से परिवार के मुखिया की जान चली गई। इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

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नींद में ही आ गई मौत
बिधनू थाना क्षेत्र के कठारा गांव निवासी किसान श्रवण सिंह चंदेल (65) शुक्रवार की सुबह अपने मकान के अगले हिस्से में बने बरामदे के नीचे सो रहे थे। पास ही उनकी भैंस का बच्चा (पड़वा) भी बंधा हुआ था। परिवार के अन्य सदस्य—बेटा नितुल, बहू मधू और पत्नी मुन्नी देवी,मकान के पिछले कमरों में सो रहे थे।सुबह करीब पांच बजे, जब पूरा गांव गहरी नींद में था, तभी ईंटों और चूने से बनी करीब 70 साल पुरानी बरामदे की छत अचानक भरभराकर गिर गई। भारी भरकम मलबा सीधे सो रहे श्रवण सिंह और मवेशी पर आ गिरा। छत गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग भी सहम गए।

फाइल फोटो मृतक किसान श्रवण सिंह - फोटो : amar ujala

अपनों को बचाने की जद्दोजहद

हादसे की आवाज सुनते ही पिछले हिस्से में सो रहे परिजन चीखते-चिल्लाते हुए बाहर की तरफ भागे। सामने का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बरामदा मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका था और श्रवण सिंह कहीं नजर नहीं आ रहे थे। बेटा नितुल मदद के लिए शोर मचाने लगा, जिसके बाद पड़ोसी भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों और परिजनों ने मिलकर हाथों-हाथ मलबा हटाना शुरू किया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद जब श्रवण सिंह को बाहर निकाला गया, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। भारी मलबे के नीचे दबने से मवेशी ने भी मौके पर ही दम तोड़ दिया था। पिता का बेजान शरीर देख बेटा बिलख पड़ा, वहीं पत्नी मुन्नी देवी सदमे में बेहोश होकर गिर पड़ीं।

ठेकेदार को दिया था बयाना, आज से ही लगना था काम

इस हादसे में एक बेहद दुखद संयोग भी सामने आया। बेटे नितुल ने रोते हुए बताया कि पिता को अहसास था कि बरामदा जर्जर हो चुका है। इसीलिए उन्होंने मकान के अगले हिस्से को गिराकर दोबारा बनवाने का फैसला लिया था। हादसे से महज एक दिन पहले (गुरुवार को) ही उन्होंने ठेकेदार को निर्माण कार्य के लिए बयाना (Advance) की रकम दी थी। तय योजना के मुताबिक, शुक्रवार सुबह से ही मजदूर आने वाले थे और जर्जर छत को गिराने का काम शुरू होना था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; जिस छत को कुछ घंटों बाद गिराया जाना था, उसने गिरने के लिए शुक्रवार तड़के का वक्त चुना और किसान को मौत की नींद सुला दिया।

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हादसे की सूचना मिलने पर क्षेत्रीय लेखपाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का मुआयना किया और क्षति का आकलन कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया है, ताकि परिवार को आपदा राहत कोष से मदद मिल सके। हालांकि, शोकाकुल परिजनों ने पुलिसिया कार्यवाही और पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। बिधनू थाना प्रभारी तेज बहादुर सिंह ने बताया कि पुलिस को फिलहाल इस मामले में कोई लिखित सूचना या तहरीर नहीं मिली है। ग्रामीण स्तर पर ही परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हैं।

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