बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले में 1800 से ज्यादा प्राइमरी स्कूलों को मान्यता दे रखी है। नियमानुसार सभी निजी स्कूलों को आरटीई के तहत कुल क्षमता के सापेक्ष 25 प्रतिशत छात्रों को निशुल्क दाखिला देना है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कराई गई मैपिंग में महज 1422 स्कूल ही आरटीई के दायरे में हैं।
कानपुर नगर के 44 वार्डों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाने का सपना टूट सकता है। दरअसल, नगर निगम सीमा के चार, नगर पंचायत बिठूर के पांच, नगर पंचायत शिवराजपुर के पांच, नगर पालिका परिषद घाटमपुर के 12 और नगर पालिका परिषद बिल्हौर के 18 वार्ड ऐसे हैं, जिनमें आरटीई (शिक्षा का अधिकार) पोर्टल में एक भी निजी स्कूल ही नहीं है।
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प्रवेश के लिए छह फरवरी से शुरू हुए पहले चरण के आवेदन में इन वार्डों के अभिभावकों ने जब फार्म भरना चाहा, तो कोई स्कूल ही नहीं दिखा। नियमानुसार छात्र जिस वार्ड का निवासी होगा, उसको उसी वार्ड का स्कूल आवंटित किया जाएगा। वार्ड में स्कूल न होने के चलते 44 वार्डों के लगभग 800 छात्र इस योजना से बाहर हो गए हैं। हालांकि अब अधिकारी कह रहे हैं कि छात्रों को दूसरे वार्डों के स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा।
जिले में स्कूल 1800 से ज्यादा, आरटीआई के दायरे में 1422
बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले में 1800 से ज्यादा प्राइमरी स्कूलों को मान्यता दे रखी है। नियमानुसार सभी निजी स्कूलों को आरटीई के तहत कुल क्षमता के सापेक्ष 25 प्रतिशत छात्रों को निशुल्क दाखिला देना है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कराई गई मैपिंग में महज 1422 स्कूल ही आरटीई के दायरे में हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारियों द्वारा की गई मैपिंग पर सवाल उठने लगे हैं।
जिन वार्डों में स्कूल नहीं हैं, उनमें रहने वाले छात्रों को पड़ोस के वार्डों के स्कूलों में दाखिला दिलाया जाएगा। आवेदन करते समय अभिभावक आस-पड़ोस के वार्ड के स्कूल चुन सकते हैं। आरटीई के दायरे में उन्हीं स्कूलों को रखा जाता है, जिनकी मान्यताएं और यू डायस कोड समेत सभी मानक पूरे हैं। - सुरजीत कुमार सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी