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UP: कोरोना काल में मदद कर जीत लिया था विश्वास... फैला दिया धर्मांतरण का मकड़जाल; कैसे होता था धर्म परिवर्तन?

Sun, 11 Jan 2026 01:33 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर देहात

सार

कानपुर देहात में धर्मांतरण की कहानी कोरोना काल से शुरू हुई थी। शातिरों ने पहले लोगों को उनके कौशल निखारने और मदद करने के नाम पर विश्वास जीता। इसके बाद साथ ही धर्मांतरण का मकड़जाल फैलाकर कानपुर देहात के अलावा कई स्थानों के लोगों का धर्मांतरण करवा दिया। 
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dharm parivartan - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कोरोना महामारी ने लोगों को रोजगार से लेकर पेट भरने तक का संकट खड़ा कर दिया था। उस दौर में मिली तनिक सी मदद भी लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। अकबरपुर थाना से एक किलोमीटर दूर पर बंद हुए एक स्कूल में व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने वाले शातिरों ने पहले लोगों को उनके कौशल निखारने व मदद करने के नाम पर विश्वास जीता। 
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साथ ही धर्मांतरण का मकड़जाल फैलाकर कानपुर देहात के अलावा कई स्थानों के लोगों का धर्मांतरण करवा दिया। कन्नौज जिले के धर्मांतरण के मामले में पन्नालाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कानपुर देहात से उसके तार जुड़े होने की जानकारी पर एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय की ओर से एसआईटी का गठन कर जांच शुरू करवाई गई थी। 

शनिवार को नवाकांति का संचालन करने वाले डेनियल शरद सिंह, हरिओम त्यागी व सावित्री शर्मा को गिरफ्तार किया है। एसपी ने बताया कि नवाकांति सोसाइटी में पहले स्कूल का संचालन होता था। जोकि कोविड में बंद हो गया था। बाद में यहां व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र का संचालन शुरू किया था। 
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आर्थिक रूप कमजोर लोगों को फंसाते थे
तीनों लोग सूक्ष्म व लघु स्तर पर अपना जाल फैला कर अनुसूचित जाति के लोगों व आर्थिक रूप कमजोर लोगों को फंसाते थे। आरोपी लोगों को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई व अन्य तकनीकी कौशल प्रशिक्षण का प्रलोभन देकर अपने पास लाते थे। 

जिले में करीब 50 हैंडपंप लगवाए
साथ ही लोगों को हैंडपंप सहित अन्य छोटी-छोटी जरूरत की चीजें देते थे। लोगों के जाल में फंसने पर बाइबिल रीडिंग से लेकर वेपटिस्म प्रक्रिया से शुद्धीकरण के बाद धर्मांतरण तक काम करते थे। इन लोगों ने जिले में करीब 50 हैंडपंप लगवाए हैं। जिनकी जांच की जा रही है। 
 

हैंडपंप लगाने में करीब 50 हजार रुपये तक का खर्चा
प्रत्येक हैंडपंप लगाने में करीब 50 हजार रुपये तक का खर्चा आता था। जांच के दौरान पुलिस को संस्था के भवन से कई कागजात मिले हैं। जिनकी गहन जांच की जा रही है। आरोपियों ने अभी तक कितने लोगों का धर्मांतरण करवाया है। इनके अंतरजनपदीय व दूसरे प्रांतों से तार जुड़े होने को लेकर जांच की जा रही है।

 

बच्चों और युवाओं के लिए अलग-अलग चलाते थे क्लब
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने यह भी बताया कि वह लोग गांवों में रहने कम पढ़े लिखे लोगों, युवाओं, बच्चों व बुजुर्गों के हिसाब से क्लब बनाकर संचालन करते थे। इनमें इन लोगों के दो क्लब सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहते थे। जिसमें पहला क्लब गृह कलीसिया के नाम से संचालित होता था। 
 

जिसमें गांव स्तर पर ईसाई धर्म को अपना लेने वाला युवक अपने घर में अस्थाई रूप से चर्च का संचालन कर प्रार्थना सभा कर लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाने व ईसाई धर्म की खूबियां गिनाकर उन्हें प्रभावित करता था। लोगों को झांसे में लेने के बाद उनका धर्म परिवर्तन करवाने का काम करते था। 
 

वहीं दूसरा समूह अवाना जोकि विशेष तौर पर बच्चों को धर्मांतरण करवाता था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के ओर से वीडियो बाइबिल रीडिंग स्कूल, वोकेशनल सेंटर, प्रौढ़ शिक्षा केंद्र, सिलाई प्रशिक्षण केंद्र आदि का संचालन किया गया। यहां तक कि धर्मांतरण के बाद जिले में ईसाई धर्म में सबसे परिपक्व हो जाने वाले व्यक्ति को जिला स्तर का पादरी आदि भी घोषित कर देते थे।

प्रार्थना सभा में शामिल होने पर मिलते थे 200 रुपये
व्यवसायिक कंपनियां व चिट फंड कंपनियां जिस प्रकार से एक चेन से लोगों को जोड़कर अपना कारोबार बढ़ाती हैं। कारोबार को एक नियत स्तर पर लाभ पहुंचाने पर संबंधित सदस्य को उपहार भी देती हैं। ठीक इसी तरह धर्मांतरण गिरोह के सदस्य भी अनुसूचित जाति के लोगों का धर्म परिवर्तन करवाने के लिए प्रयोग करते थे। पहले यह कुछ लोगों को मदद के नाम पर अपने झांसे में लेते थे। 
 

इसके बाद तय स्थान पर होने वाली प्रार्थना सभा में शामिल होने के 200 रुपये देते थे। ईसाई धर्म का प्रचार करने व धर्मांतरण करवाने वाले लोगों को कौशल संबंधी प्रशिक्षण देने के साथ छह से 10 हजार रुपये मासिक वेतन के रूप में देते थे। इसके बाद नए लोगों को जागरूक कर धर्मांतरण करवा देने पर भी उनको उपहार के रूप में तय धनराशि मुहैया करवाते थे। इसके साथ ही अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए भी खर्चा देते थे।
 

पुलिस के हाथ लगी फोटो में दिख रहे विदेशी, फंडिंग की होगी जांच
एसआईटी की जांच में पकड़े गए आरोपियों के रिकार्ड से कुछ पुरानी फोटो हाथ लगीं हैं। साथ ही दर्ज कराई गई एफआईआर में रामभरोसे ने विदेश से संस्था को फंडिंग किए जाने के आरोप लगाए हैं। इस पर भी पुलिस कड़ी से कड़ी मिलाकर बारीकी से जांच कर रही है। 
 
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एसपी ने बताया कि पुलिस को कुछ फोटो मिली हैं। इसमें कुछ फोटो में 15 से 20 व कुछ में 40 से 50 लोग बैठकर बाइबल पढ़ते दिख रहे हैं। इसमें कुछ विदेशी दिखने वाले लोग भी प्रार्थना करते दिख रहे हैं। इस आधार पर फोटो व बैंक अकाउंट का आकलन किया जा रहा है।

 
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