सही आकलन हो सकता है प्रभावित
ऐसे में अलग-अलग इलाकों के मरीजों को एक ही वार्ड में दर्ज किए जाने से क्षेत्रवार स्थिति का सही आकलन प्रभावित हो सकता है। इस विसंगति से मरीजों के साथ निजी पैथोलॉजी लैब संचालक भी हैरान हैं। नौबस्ता, मंधना, बर्रा-3, हनुमंत विहार नौबस्ता, कुरसवां, लक्ष्मीपुरवा, संजीव नगर, नई बस्ती गोविंद नगर, सुभाष नगर शिवराजपुर, शारदा नगर और घाटमपुर के मरीजों के रिकॉर्ड में बहादुर शाह जफरनगर (वार्ड-8) दर्ज होने की बात सामने आई है।
तकनीकी मैपिंग या डेटा फीडिंग की त्रुटि
लैब संचालकों का कहना है कि उनके कलेक्शन सेंटर या जांच केंद्र का बहादुर शाह जफरनगर में कोई केंद्र नहीं है। मरीजों के वास्तविक निवास स्थान और रिकॉर्ड में दर्ज वार्ड के बीच अंतर ने रिपोर्टिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि यह तकनीकी मैपिंग या डेटा फीडिंग की त्रुटि है, तो इसे समय रहते दुरुस्त किया जाना जरूरी है, ताकि डेंगू नियंत्रण की कार्रवाई सही क्षेत्र और आंकड़ों के आधार पर की जा सके।
तकनीकी चूक या आंकड़ों की बाजीगरी
- 11 अलग-अलग इलाकों के मरीज एक ही वार्ड में कैसे दर्ज हुए?
- क्या इस तरह की मैपिंग से जिले के वास्तविक डेंगू हॉटस्पॉट और संक्रमण के फैलाव की तस्वीर प्रभावित नहीं हो रही?
- घाटमपुर या नौबस्ता के मरीज रिकॉर्ड में बहादुर शाह जफरनगर के दिखाए जाएंगे, तो एंटी-लार्वा अभियान, फॉगिंग और सैनिटाइजेशन जैसी गतिविधियां किस क्षेत्र में संचालित होंगी?
- क्या इससे वास्तविक प्रभावित क्षेत्रों में रोकथाम अभियान प्रभावित नहीं होगा?
- यदि यह पोर्टल की तकनीकी त्रुटि है तो इतने समय से इसे दुरुस्त क्यों नहीं किया गया?
रिपोर्ट में बहादुर शाह जफरनगर दर्ज होने के बारे में जानकारी नहीं है। इसके बारे में जानकारी करने के बाद ही आगे कुछ बता पाएंगे। -डॉ. राजेश्वर सिंह, नोडल अधिकारी