कमिश्नरी पुलिस दंगा, बवाल नियंत्रण करने के लिए दंगा नियंत्रण स्कीम लागू करती है जिसमें पुलिसकर्मियों को बवालियों से निपटने का अभ्यास कराया जाता है। यह स्कीम त्योहारों के समय या दो से तीन महीने के अंतराल में लागू करते हैं। इसमें अलग अलग घटनाक्रमों का नाट्य रूपांतरण कर उससे निपटने तरीका अपनाया जाता है। अब बवाल और हंगामा जरा जरा सी बात पर हो रहा है। चोकी और थाना स्तर पर जरा सी देरी करने पर बड़ी घटना हो जा रही है। इसको रोकने और नियमित कार्रवाई के लिए नई विंग तैयार की गई है।
जेसीपी के जाते ही पहले बनी विंग खत्म
तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध व मुख्यालय विनोद कुमार सिंह ने एटीएस की तरह विंग बनाई थी। इसे आतंकी घटना होने पर हमलावरों को रोकने और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए बनाया गया था। करीब 40 पुलिसकर्मियों को एटीएस मुख्यालय लखनऊ में एक महीने का प्रशिक्षण मिला था। वहां से आने के बाद पुलिस कमिश्नर और जेसीपी मुख्यालय और जेसीपी कानून व्यवस्था कार्यालयों के बाहर तैनात किए गए थे। दोनों जेसीपी के जाते ही विंग समाप्त कर दी गई। उनके स्टाफ को थानों और कार्यालयों में रवाना कर दिया।
बवालियों और तोड़फोड़ की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए नई विंग बनाई गई है। पहले चरण में इसमें 50 पुलिसकर्मियों को लिया गया है। यह काले रंग के बॉडी प्रोटेक्टर के साथ तैनात रहेगी। -डॉ. विपिन ताडा, अपर पुलिस आयुक्त, कानून व्यवस्था