मेट्रो ट्रेन रीजनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक से लैस हैं। इससे ट्रेन संचालन में 35 फीसदी तक ऊर्जा (बिजली) की बचत होगी। दरअसल, रीजनरेटिव ब्रेकिंग प्रणाली से ऊर्जा का उत्पादन होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को आईआईटी से मोतीझील के बीच मेट्रो ट्रेन का लोकार्पण करेंगे। इसके बाद बुधवार सुबह से आम लोग मेट्रो में सफर कर सकेंगे। सबसे पहले प्रधानमंत्री आईआईटी से गीतानगर स्टेशन तक यात्रा करेंगे।
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इसके बाद निरालानगर रैली स्थल से बटन दबाकर मेट्रो का शुभारंभ करेंगे। इधर बटन दबाते ही उधर बच्चों को लिए तैयार खड़ी मेट्रो दौड़ पड़ेगी। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद रहेंगे।
दो साल डेढ़ महीने में दौड़ पड़ेगी मेट्रो
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 नवंबर 2019 को कानपुर मेट्रो के सिविल निर्माण कार्य की शुरुआत की थी। दो साल के भीतर 10 नवंबर को मुख्यमंत्री ने आईआईटी से मोतीझील के बीच मेट्रो के ट्रायल रन को हरी झंडी दिखाई थी। यूपीएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने कहा कि इतने कम समय में मेट्रो सेवा शुरू करना बड़ी उपलब्धि है।
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तीन कोच की छह मेट्रो ट्रेन चलेंगी
कुमार केशव ने बताया कि तीन-तीन कोच वाली छह मेट्रो ट्रेन आईआईटी से मोतीझील के बीच चलेंगी। 29 दिसंबर से सुबह 6:00 बजे से रात 10:00 बजे तक मेट्रो की सुविधा मिलेगी। शुरुआत में क्यूआर कोड वाले टिकट की सुविधा होगी। इसके बाद स्मार्ट कार्ड भी शुरू किए जाएंगे। इसमें एक तरफ की यात्रा में 10 प्रतिशत किराये की छूट मिलेगी।
सभी स्टेशनों को मिली प्लेटिनम रैंकिंग
आईआईटी से मोतीझील तक बने सभी नौ स्टेशनों को इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी) की प्लेटिनम रेटिंग से प्रमाणित किया गया है। दरअसल, पूरे नौ किलोमीटर के हिस्से को ग्रीन बिल्डिंग कोड के अनुसार विकसित किया गया है, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित है। ग्रीन बिल्डिंग कोड और मापदंडों के अनुपालन के कारण व पर्यावरण प्रबंधन के लिए आईएसओ-14001 और सुरक्षा प्रबंधन के लिए आईएसओ-45001 से प्रमाणित किया गया है।
सुगम यातायात के साथ धन की भी बचत
एमडी ने कहा, मेट्रो न केवल एक आरामदायक, सुगम और सुरक्षित यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी, बल्कि धन और समय की भी बचत होगी। महिलाओं, छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों को खासी राहत मिलेगी। मेट्रो अन्य साधनों की तुलना में सस्ती है।
मेट्रो रेल परियोजना में बनेंगे दो कॉरिडोर
मेट्रो रेल परियोजना में दो कॉरिडोर शामिल हैं, जिसकी लंबाई 32.5 किलोमीटर है। पहला कॉरिडोर आईआईटी कानपुर से नौबस्ता तक 23.8 किलोमीटर लंबा है, जबकि दूसरा कॉरिडोर चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय से बर्रा-8 तक 8.6 किलोमीटर लंबा है।
बिजली भी बचाएगी मेट्रो ट्रेन
मेट्रो ट्रेन रीजनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक से लैस है। इससे ट्रेन संचालन में 35 फीसदी तक ऊर्जा (बिजली) की बचत होगी। दरअसल, रीजनरेटिव ब्रेकिंग प्रणाली से ऊर्जा का उत्पादन होगा। यह बिजली वापस सिस्टम में चली जाएगी। इसके अलावा स्टेशनों और डिपो पर लगी लिफ्ट भी रीजनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक से ऊर्जा बचाने में सक्षम हैं। इनमें 34 फीसदी तक ऊर्जा दक्षता होगी। इसके अलावा डिपो और स्टेशनों पर सोलर पैनल लगाने की भी योजना है।
पीएम के बाद स्कूली बच्चे करेंगे मेट्रो में यात्रा
सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के साथ मेट्रो में यात्रा करेंगे। इसके बाद स्कूली बच्चे मेट्रो ट्रेन में निशुल्क सफर करेंगे। उन्हें उपहार भी दिए जाएंगे। प्रधानमंत्री निरालानगर रैली स्थल से ऑनलाइन हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना करेंगे।
ट्रेन में यूपीएमआरसी के अधिकारी भी रहेंगे। ट्रेन में कटरी शंकरपुर कटरी नत्थापुरवा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय और चिंटल्स स्कूल के 200 छात्र-छात्राओं सहित स्कूलों का 30 लोगों का स्टाफ यात्रा करेगा। ट्रेन को दो महिला ऑपरेटर चलाएंगी। दोनों लखनऊ मेट्रो रेल में कार्यरत हैं। कानपुर मेट्रो में भी महिला ट्रेन आपरेटरों की भर्ती की गई है।
मेट्रो ट्रेन से लेकर स्टेशन तक सजाए गए
सोमवार को सभी मेट्रो स्टेशन दूधिया रोशनी से जगमगाते नजर आए। झालर भी लगाई गई हैं। यूपीएमआरसी ने ट्रेन के साथ ही सभी स्टेशनों को दुलहन की तरह सजाया है।
मेट्रो में खास
- सभी स्टेशनों की पहली मंजिल पर टिकट मिलेंगे और दूसरी मंजिल से ट्रेन। टिकट क्यूआर कोड युक्त होंगे।
- पहली मंजिल पर ही टिकट की जांच की व्यवस्था है। जांच के बाद ही यात्री आगे जा सकेंगे। बैग आदि की जांच के लिए लगेज स्कैनर भी हैं। यात्रियों को आटोमैटिक फेयर कलेक्शन डोर में स्कैनिंग के लिए टिकट लगाना पड़ेगा।
- स्टेशन से लेकर ट्रेन तक में दिव्यागों, दृष्टिहीनों के लिए विशेष सुविधाएं हैं। दृष्टिहीनों के लिए लिफ्ट में ब्रेल लिपि का बटन है। पहली मंजिल पर पहुंचकर टिकट काउंटर और वहां से प्लेटफार्म तक जाने के लिए टेकटाइल पाथ बना है। दिव्यागों के लिए ट्रेन में अलग कुर्सी हैं।
- स्टेशन की पहली मंजिल से लेकर प्लेटफार्म तक डिजिटल डिस्पले बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिनसे ट्रेन आने की जानकारी मिलेगी।
- मेट्रो ट्रेनों में एनाउंसमेंट और डिजिटल डिस्पले बोर्ड के माध्यम से जानकारी मिलती रहेगी। ट्रेनों के सभी कोचों में सीसीटीवी कैमरे, मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट भी लगे हैं।
- ट्रेनों में पैनिक बटन भी है। किसी भी आपात स्थिति में बटन दबाकर चालक से बात की जा सकेगी। दिव्यांग इस बटन को दबाकर ट्रेन में चढ़ने या उतरने के लिए ट्रेन को कुछ देर रुकवा सकते हैं।