जिलों को सत्यापन के निर्देश दिए थे
समय रहते सत्यापन नहीं हुआ तो इन किसानों के पात्रता सूची से बाहर होने की आशंका है। दरअसल, पंजीकरण के दौरान भूमि स्वामित्व और अन्य विवरणों में गड़बड़ियां मिलने पर शासन ने ऐसे लाभार्थियों की सूची तैयार कर जिलों को सत्यापन के निर्देश दिए थे। प्रदेश में ऐसे 15,35,858 मामले सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 10,19,117 मामले पूर्व भूमि स्वामी की पहचान अधूरी होने से जुड़े हैं।
माइक्रो प्लान किया जाएगा तैयार
इसके अलावा 2,74,742 मामलों में विरासत के अलावा किसी अन्य कारण से म्यूटेशन दर्ज है, जबकि 2,41,999 मामलों में पूर्व और वर्तमान दोनों भूमि स्वामियों का डाटा दर्ज है। शासन ने अब फार्मर रजिस्ट्री अभियान के साथ पीएम-किसान के लंबित मामलों के सत्यापन को जोड़ने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर माइक्रो प्लान तैयार किया जाएगा।
संदिग्ध डाटा का कराया जाएगा भौतिक सत्यापन
किसानों की भागीदारी और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से संदिग्ध डाटा का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। 30 सितंबर तक सभी लंबित मामलों का सत्यापन पूरा कर उसकी रिपोर्ट एप पर अपलोड करनी होगी। जिला स्तर पर उप कृषि निदेशक और तहसील स्तर पर तहसीलदार साप्ताहिक समीक्षा करेंगे। वहीं ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक रोजाना प्रगति की निगरानी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
शासन के निर्देशों पर लंबित डाटा संबंधित तहसालों को भेज दिया गया है। जल्द सत्यापन कर रिपोर्ट शासन भेजी जाएगी। -आरएस वर्मा, उपनिदेशक कृषि