6,775 मीट्रिक टन ज्यादा यूरिया खेतों में डाली
अप्रैल से जुलाई तक 10,403 मीट्रिक टन खाद की बिक्री हुई थी। वर्ष 2025 में शासन की ओर से धान का रकबे का लक्ष्य बढ़ाकर 47,188 हेक्टेयर कर दिया था। उस समय 45,297 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई की गई थी। इस बार बीते वर्ष के मुकाबले रकबा 13,124 हेक्टेयर बढ़ा और धान की खपत 17,178 मीट्रिक टन हो गई। इस वर्ष धान का रकबा तो बढ़ा है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में 6,775 मीट्रिक टन ज्यादा यूरिया किसानों ने खेतों में डाल दी।
दुकानदारों की जांच में जुटा विभाग
अभी किसानों ने पहली बार यूरिया खेतों में डाली है, एक माह बाद दोबारा खाद डालने पर आंकड़ा दोगुना हो जाएगा। ये आंकड़े खाद की कालाबाजारी की तरफ भी इशारा करते हैं। कृषि विभाग के अधिकारी धान का मौसम अनुकूल रहने को रकबा बढ़ने का प्रमुख कारण बता रहे हैं। इसके अलावा किसानों द्वारा जरूरत से अधिक खाद खरीदना भी एक वजह है। अब कृषि विभाग अधिक यूरिया खाद खरीदने किसान व बिक्री करने वाले दुकानदारों की जांच कर रहा है।
किसान दो बार डाल रहे खाद
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी धान की रोपाई हुई है। निराई के बाद एक बार और यूरिया खेतों में डाली जाएगी। किसान रोपाई और निराई के समय खेतों में खाद का प्रयोग करते हैं।
मंडल में धान की खपत (आंकड़े मीट्रिक टन में)
जिला 2024 2025
कन्नौज 16,720 26,342
कानपुर देहात 7,276 16,202
फर्रुखाबाद 23,465 31,713
कानपुर नगर 10,403 17,178
औरैया 8,652 14,873
इटावा 8,778 14,214
मंडल में धान की खेती का रकबा एक लाख हेक्टेयर से अधिक बढ़ गया है। मानसून भी समय पर आने की वजह से इस बार यूरिया की खपत ज्यादा हुई है। शासन के निर्देश पर ज्यादा खपत की जांच कराई जा रही है। -श्रीनिवास शर्मा, संयुक्त आयुक्त कृषि